बिहार के आईएएस अधिकारी जितेंद्र गुप्ता के मामले में सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार को बडा झटका दिया है। गुप्ता की दलीलों पर भरोसा जताते हुये कैट ने राज्य सरकार को 4 हफ्तों में उनके कैडर बदलने की मांग पर अमल करने का आदेश दिया है। 2013 बैच के बिहार कैडर के आईएस अधिकारी जितेंद्र गुप्ता की राज्य सरकार से उस वक्त ठनी जब वे कैमूर जिले में मोहनिया में एसडीएम के पद पर कार्यरत्त थे।
गुप्ता को भारी पडी थी अपराधियों के खिलाफ सख्ती
कैमूर जिला यूपी और बिहार के सीमा पर है। यहां से राष्ट्रीय राजमार्ग 2 गुजरती है। बताया जाता है कि यहां परिवहन संबंधी अपराध बहुत होते हैं। कुछ आपराधिक तत्व अथवा एंट्री माफिया भारी वाहन और ट्रकों को बिना राजस्व दिए, पुलिस एवं परिवहन विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों की सांठ-गांठ से प्रदेशों की सीमा पार करवाते थे। ये गोरखधंधा बहुत बड़े स्तर पर बड़े-बड़े अधिकारियों और नेताओं की मिलीभगत से जारी था। इससे राज्य सरकार को न सिर्फ हर महीने करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि होती थी। बल्कि ओवरलोडिड वाहनों के परिचालन से होने वाली अनेक दुर्घटनाओं में हर वर्ष हज़ारों लोग मारे जाते हैं।
आईएएस गुप्ता ने इन अपराधिक तत्वों के खिलाफ जब सख्ती बरतनी शुरू कर दी तो उन्हें इसका खामियाजा भूगतना पडा। गुप्ता का कहना है कि वसूली की रकम चूंकि उपर तक जाती थी। इसलिये उन्हें लक्ष्य कर शिकार बनाया गया। माफिया और पुलिस ने मिलकर उल्टा गुप्ता को ही झूठे आपराधिक मामले में फसा दिया गया।
प्रताड़ना के शिकार गुप्ता ने न्यायालय मेंं भी लगाई थी गुहार
पुलिस-प्रशासन की ओर से प्रताड़ित होने पर गुप्ता ने न्यायालय में गुहार लगाई। उनपर लगे झूठे मामलों के विरुद्ध उच्च न्यायालय ने याचिका स्वीकार करते हुए पूरे मामले को निरस्त कर दिया। बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने भी पटना उच्च न्यायालय के इस निर्णय को सही ठहराते हुए बिहार सरकार की याचिका को कोई मेरिट नहीं होने के कारण निरस्त किया।
जिसके बाद बिहार सरकार ने गुप्ता को अन्य तरीकों से परेशान करना शुरू किया। जिन आरोपों को उच्चतम न्यायालय ने भी गलत और झूठा माना, उन्हीं के आधार पर गुप्ता के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गई। उनके नौकरी के कन्फर्मेशन और प्रोमोशन में बिना किसी आधार के भेदभाव किया और देरी की। उन्हें सैलरी भी नहीं दी और सस्पेंड कर दिया गया। भेदभाव का आलम ये रहा की उनकी सुरक्षा भी छीन ली गई। ऐसे हालातों का सामना करते वक्त गुप्ता को काफी शारिरीक कष्ट झेलने पडे। उनके स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पडा।
अमर उजाला से अपनी वेदना बताते हुए गुप्ता ने कहा कि मेरे बच्चों की पढ़ाई बर्बाद हो गई। मेरे परफॉर्मेंस अप्रेसल को भी बिहार सरकार ने बर्बाद कर दिया। सरकार की इस प्रताड़ना और भेदभाव से तंग आकर मैंने भारत सरकार को अपने कैडर बदलने के लिए आवेदन दिया। इसी बीच मैं बिहार सरकार द्वारा किये गए अपने मौलिक अधिकारों के हनन के कारण, संविधान की धारा 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय गया जहां न्यायालय ने भारत सरकार को आदेश दिया कि मुझ पर की गई यातनाओं को देखें और उसमें 3 महीने में सही निर्णय लें।
कैट के आदेश से गुप्ता खुश
कैट के आदेश से गुप्ता बहुत खुश हैं। उनका कहना है कि भारत सरकार ने मेरे केस को देखते हुए मेरी सुरक्षा की दृष्टि से मेरा कैडर बिहार से बदलकर हरियाणा करने का प्रस्ताव बढाया किन्तु बिहार सरकार ने इसकी स्वीकृति नही दी थी और ये प्रस्ताव खारिज़ हो गया। इसके विरुद्ध मैंने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल की प्रधान पीठ में याचिका दायर की जिसका निर्णय 22 मार्च 2018 को आया।
ट्रिब्यूनल ने बिहार में माफियाओं से मेरी जान के खतरे को देखते हुए, आदेश दिया कि बिहार सरकार4 हफ्ते में अपनी स्वीकृति दे और भारत सरकार मुझे या तो हरियाणा स्थानांतरित कर दे या केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेज दे।