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Bihar News: ‘आनंद शंकर माधवन साहित्य रत्न’ से सम्मानित हुए पारस कुंज, कवि सम्मेलन में मंत्रमुग्ध हो गए श्रोता

Sat, 14 Feb 2026 04:05 PM IST
भागलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांका

सार

Banka News: मंदार विद्यापीठ परिसर में आयोजित समारोह के समापन पर राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। इसमें शामिल कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। 
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विस्तार
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बांका जिले के मंदार विद्यापीठ परिसर में शुक्रवार की रात्रि आयोजित भव्य समारोह में वरिष्ठ पत्रकार, कवि एवं लघुकथाकार पारस कुंज को प्रतिष्ठित ‘आनंद शंकर माधवन साहित्य रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान साहित्य मनीषी आनंद शंकर माधवन की 112वीं जयंती के अवसर पर आयोजित ‘आनंद शंकर माधवन राष्ट्रीय कवि सम्मेलन’ के दौरान प्रदान किया गया। सैकड़ों बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों एवं छात्र-छात्राओं की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित समारोह में तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विमलेंदु शेखर झा ने पारस कुंज को अंगवस्त्र, माधवन प्रतीक चिह्न, पुष्पगुच्छ तथा 50,001 रुपये की सम्मान राशि भेंट कर अलंकृत किया।

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‘यूं ही कोई पारस नहीं होता’
समारोह में कवि पारस कुंज की बहुआयामी साहित्यिक साधना एवं सांस्कृतिक सक्रियता को विशेष रूप से बताया गया। वह ‘यूं ही कोई पारस नहीं होता’ के नायक होने के साथ-साथ ‘युवा संगम’, ‘अंगमेल’, ‘कथा’, ‘केसरवानी’, ‘वामन के डेग’, ‘अंगदीप’, ‘शब्दयात्रा’, ‘आत्मदृष्टि’ तथा ‘भारत की प्रतिनिधि लघुकथाएं’ जैसी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं और पुस्तकों के संपादन से जुड़े रहे हैं। इसके अतिरिक्त वह कई साहित्यिक-सांस्कृतिक मंचों के संस्थापक तथा ‘शब्दयात्रा गोपाल सिंह नेपाली आंदोलन’ के राष्ट्रीय प्रणेता के रूप में भी सक्रिय हैं।
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'सामूहिक साधना का परिणाम है यह उपलब्धि'
अपने सम्मान भाषण में पारस कुंज ने इस उपलब्धि को साहित्य, समाज और संस्कृति के प्रति समर्पित साथियों की सामूहिक साधना का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें अपने साहित्यिक दायित्वों के निर्वहन के लिए और अधिक प्रेरित करेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंदार विद्यापीठ के अध्यक्ष पवन कुमार सिंह ने की। सचिव अरविंदाक्षन माडम्बथ आर सिनेट सदस्य मृत्युंजय कुमार सिंह गंगा मंचासीन रहे। अतिथियों ने अपने संबोधन में आनंद शंकर माधवन के साहित्यिक योगदान को स्मरण करते हुए नई पीढ़ी से साहित्य और संस्कारों से जुड़ने का आह्वान किया। समारोह के समापन पर राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें विभिन्न राज्यों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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