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Bihar: निशांत कुमार के स्वास्थ्य विभाग में एक और कारनामा! चार महीने में एक डॉक्टर के दो पद से फैला भ्रमजाल

Sat, 27 Jun 2026 03:47 PM IST
भागलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भागलपुर

सार

Bihar News: पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने पटना मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को हटाया तो हड़कंप मच गया। विभाग हिला हुआ है। अब इसी हालत में विभाग से एक और हड़कंप वाली खबर निकली है- चार महीने में एक डॉक्टर के दो पद! जानिए पूरा मामला क्या है।
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जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पूर्वी बिहार के सबसे बड़े अस्पताल जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक डॉक्टर की पदोन्नति को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. अजय प्रताप की पदोन्नति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। चार महीने के भीतर जारी अलग-अलग सरकारी दस्तावेजों में उन्हें कहीं वरीय चिकित्सा पदाधिकारी तो कहीं सामान्य चिकित्सा पदाधिकारी बताया गया है। मामले में पंजीयन संख्या में भी अंतर सामने आने के बाद प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
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चार महीने के भीतर ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. अजय प्रताप के पद को लेकर अलग-अलग स्थिति सामने आई है। एक ओर उन्हें वरीय चिकित्सा पदाधिकारी बताते हुए जिम्मेदारी दी गई, वहीं बाद में जारी सरकारी अधिसूचना में उनका नाम सामान्य चिकित्सा पदाधिकारी के रूप में सामने आया। इस मामले के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर यह प्रशासनिक गलती है या किसी भ्रम के कारण ऐसा हुआ। हालांकि, अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

दो अलग-अलग अधिसूचनाओं से बढ़ा विवाद
अस्पताल अधीक्षक कार्यालय की ओर से डॉ. अजय प्रताप को वरीय चिकित्सा पदाधिकारी बताते हुए ब्लड बैंक का प्रभारी नियुक्त किया गया था। इसके लिए सरकार की अधिसूचना का हवाला दिया गया था। लेकिन बाद में स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी एक अन्य अधिसूचना में उनका नाम सामान्य चिकित्सा पदाधिकारी के रूप में दर्ज मिला। इसके बाद सवाल उठने लगे कि क्या एक ही नाम वाले दो अलग-अलग डॉक्टरों के बीच भ्रम हुआ या किसी स्तर पर दस्तावेजों की जांच में चूक हुई।
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पंजीयन संख्या में अंतर बना सवालों की वजह
मामले में सबसे बड़ा सवाल डॉक्टरों की पहचान को लेकर सामने आया है। बताया जा रहा है कि अलग-अलग दस्तावेजों में डॉ. अजय प्रताप नाम के डॉक्टरों की पंजीयन संख्या अलग-अलग दर्ज है। एक सूची में वरीय चिकित्सा पदाधिकारी के रूप में दर्ज डॉक्टर की पंजीयन संख्या अलग है, जबकि दूसरी अधिसूचना में सामान्य चिकित्सा पदाधिकारी के रूप में दर्ज डॉक्टर की पंजीयन संख्या अलग बताई गई है। इसी अंतर के कारण पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए हैं।

डॉ. अजय प्रताप ने अपनी सफाई में क्या कहा?
डॉ. अजय प्रताप ने मामले में अपनी सफाई देते हुए कहा कि उन्हें पदोन्नति संबंधी जानकारी कार्यालय से मिले पत्र के आधार पर हुई थी। उन्होंने बताया कि बाद में जब उन्हें वास्तविक स्थिति की जानकारी मिली तो उन्होंने मुख्यालय और अस्पताल अधीक्षक को आवेदन देकर सुधार का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि उनका सरकारी नोटिफिकेशन सामान्य चिकित्सा पदाधिकारी के रूप में हुआ है और वह उसी के अनुसार कार्य करने के लिए तैयार हैं।

ब्लड बैंक संचालन की योग्यता होने का किया दावा
डॉ. अजय प्रताप ने यह भी स्पष्ट किया कि ब्लड बैंक से जुड़े कार्यों के लिए उनके पास आवश्यक योग्यता और अनुभव मौजूद है। उन्होंने कहा कि वह नियमानुसार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।

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वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि यदि इस मामले में शिकायत प्राप्त होती है तो नियमानुसार जांच कराई जाएगी। जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
 
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