लिपिक और स्टोनो 70 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ाए
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बिहार में रिश्वतखोरी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। आए दिन कोई न कोई भ्रष्ट अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा जाता है। इसी बीच भागलपुर से भी दो रिश्वतखोर पकड़ाए हैं। एसडीएम कार्यालय में कार्यरत लिपिक और स्टोनो को निगरानी टीम ने 70 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है। इनमें से एक आरोपी सृजन घोटाले से भी जुड़ा बताया जा रहा है जो अब तक सरकारी दफ्तर में बेखौफ काम कर रहा था।
दरअसल, नाथनगर आपूर्ति कार्यालय में कार्यरत अभिजीत कुमार से सेवा संपुष्टि के नाम पर 70,000 रुपए मांगे गए थे। शिकायत मिलते ही पटना से निगरानी विभाग की टीम डीएसपी विंध्याचल प्रसाद के नेतृत्व में भागलपुर पहुंची और पूरा जाल बिछाया। कार्रवाई के दौरान लिपिक प्रेम कुमार ने रिश्वत की रकम मयंक कुमार को देने का इशारा किया। जैसे ही पैसे हाथ बदले निगरानी टीम ने दोनों को मौके पर ही दबोच लिया।
सृजन घोटाले का आरोपी फिर सक्रिय
इसमें सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक स्टेनो प्रेम कुमार पर 2007 से 2017 के बीच हुए कुख्यात सृजन घोटाले में भी आरोप हैं। उस घोटाले ने पूरे सिस्टम की साख पर गहरे सवाल खड़े किए थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने संगीन आरोपों के बावजूद वह न सिर्फ सरकारी सेवा में बने रहे बल्कि सदर अनुमंडल कार्यालय में लिपिक के पद पर तैनात रहे। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसकी सरपरस्ती में यह सब संभव हो सका।
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कोर्ट में पेशी के बाद जेल
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। निगरानी डीएसपी विंध्याचल प्रसाद ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। सोमवार की यह कार्रवाई एक बड़ा संदेश देती है कि भ्रष्टाचार की जड़ें भले ही गहरी हों लेकिन निगरानी की नजर से कोई नहीं बच सकता।