मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में बुधवार को बाढ़ प्रभावित जिलों, विशेषकर भागलपुर में चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में भागलपुर प्रमंडलीय आयुक्त हिमांशु कुमार राय, पूर्वी क्षेत्र के महानिरीक्षक विवेक कुमार, जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, वरीय पुलिस अधीक्षक हृदय कांत, नवगछिया की पुलिस अधीक्षक प्रेरणा कुमार, उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह, नगर आयुक्त शुभम कुमार सहित अन्य अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने मुख्यमंत्री को गंगा किनारे स्थित 10 जिलों की बाढ़ राहत गतिविधियों की अद्यतन जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 10 जिलों के 54 प्रखंडों के 348 पंचायतों में लगभग 24.64 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। भागलपुर में राहत एवं बचाव कार्य तेज गति से चल रहा है।
एनडीआरएफ की 7 में से 6 टीमें भागलपुर में तैनात हैं। 60 मोटरबोट और 1,233 नावों के जरिए अब तक 37,000 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। 52,573 लोगों को पॉलिथिन शीट और 1,785 लोगों को सूखा राशन उपलब्ध कराया गया है। 8,811 लोगों को बाढ़ राहत शिविरों में रखा गया है, जहां भोजन, वस्त्र आदि एसओपी के अनुसार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। 414 सामुदायिक रसोईघरों में अब तक 12.82 लाख लोग भोजन कर चुके हैं।
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जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि जिले के 12 प्रखंडों की 85 पंचायतों में लगभग 6 लाख लोग प्रभावित हैं। 8 अगस्त से सामुदायिक रसोई प्रारंभ की गई थी और बुधवार तक 186 सामुदायिक रसोई संचालित हो रही हैं, जहां 7.67 लाख लोगों को भोजन कराया गया है। आवागमन के लिए 104 नावें चलाई जा रही हैं।
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की कुल 8 टीमों के 180 जवान 36 मोटरबोट से लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं। अब तक 32,814 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। जिले में 3,360 पशु प्रभावित हुए हैं, जिनके लिए 335 क्विंटल चारा वितरित किया गया है। पशु चिकित्सा और मानव चिकित्सा दल सक्रिय हैं।
कृषि विभाग ने बताया कि 94% रोपनी पूरी हो चुकी है और फसल क्षति का आकलन जारी है। जल्द ही मुआवजा वितरित किया जाएगा। ऊर्जा विभाग ने बताया कि कहीं भी बिजली आपूर्ति बाधित नहीं हुई है। जल संसाधन विभाग ने बताया कि भागलपुर के इस्माइलपुर के बिंद टोली में हो रहे कटाव पर तेजी से कार्य जारी है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि किसी भी बाढ़ प्रभावित परिवार को कोई असुविधा न हो और अनुग्रह अनुदान की ₹7,000 की राशि शीघ्र ही उनके खातों में भेजी जाए।