28 साल बाद सलाखों के पीछे नक्सली मास्टरमाइंड
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस को 28 वर्षों की लंबी तलाश के बाद आखिरकार उस हार्डकोर नक्सली को गिरफ्तार करने में सफलता मिल गई, जो समाज में अशांति फैलाने और नक्सली गतिविधियों का मास्टरमाइंड माना जा रहा था। गिरफ्तार नक्सली की पहचान कामेश्वर यादव के रूप में हुई है, जो गोह प्रखंड के बंदेया थाना क्षेत्र के बेला बारिश गांव का निवासी है।
शनिवार की शाम एसडीपीओ कुमार ऋषि राज ने जानकारी दी कि कामेश्वर यादव पर कई थानों में गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह 1999 से फरार चल रहा था। बंदेया थाना में उसके खिलाफ 17 CLA एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था। उसके खिलाफ कोर्ट से स्थायी वारंट भी जारी हो चुका था। पुलिस को लंबे समय से उसकी तलाश थी, लेकिन हर बार वह गिरफ्तारी से बच निकलता था। इस बार सटीक खुफिया इनपुट के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे धर दबोचा।
यह भी पढ़ें: अपराधियों की अब खैर नहीं! पटना पुलिस का ऑपरेशन लंगड़ा शुरू, दो थाना क्षेत्रों में मुठभेड़
नक्सल विरोधी अभियान में तेजी
एसडीपीओ ने बताया कि एसपी अम्बरीश राहुल के निर्देश पर जिले को अपराध व नक्सल मुक्त बनाने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। पहाड़ी और जंगल इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं, साथ ही फरार नक्सलियों की तलाश में सघन छापेमारी की जा रही है। पुलिस ने बताया कि एक दिन पहले गया जिले के सलैया थाना क्षेत्र के निमिया रेहड़ा गांव से भी हार्डकोर नक्सली अखिलेश भुइयां की गिरफ्तारी हुई थी। इसके अलावा सुरक्षा बलों ने आईईडी, केन बम और अन्य विस्फोटक भी जब्त कर जंगल में ही नष्ट कर दिए हैं।
कामेश्वर यादव से पूछताछ की जा रही है और जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद कोर्ट में रिमांड पर भेजा जाएगा। पुलिस का कहना है कि जब तक क्षेत्र से नक्सलियों का पूरी तरह सफाया नहीं हो जाता, तब तक यह अभियान जारी रहेगा।