रैली में जाने से पहले हाथ सैनिटाइज करते अमित शाह
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शाह ने कहा कि मोदी जी ने किसान सम्मान निधि के माध्यम से 9.5 करोड़ किसानों के बैंक खाते में 72,000 करोड़ रुपये हर साल डालने की व्यवस्था की। आरसीईपी की चर्चा कांग्रेस शुरू करके गई थी। इसकी वजह से छोटे किसान, मछुवारे, छोटे कारोबारी, छोटे उद्योग ये सब तबाह हो जाते।
मोदी जी ने छोटे किसानों, छोटे व्यापारियों के हित में दृढ़ता से फैसला लेते हुए आरसीईपी समझौते से भारत को अलग कर लिया। कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक प्रोपेगेंडा कहा, मगर जो कह रहे हैं उनको ये मालूम नहीं है कि ये राजनीतिक प्रोपेगेंडा नहीं है बल्कि ये देश को एक बनाने की मुहिम है।
जनता कर्फ्यू भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के अंदर स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा कि देश के एक नेता की अपील पर कोई पुलिस बल प्रयोग किए बगैर पूरे देश ने घर के अंदर रहकर अपने नेता की अपील का सम्मान किया। चाहे मोदी जी ने थाली और घंटी बजाने को कहा, चाहे दीया जलाने को कहा, चाहे सेना के जवानों द्वारा आकाश से कोरोना वॉरियर्स पर फूल बरसाने की बात हो, ये सब मोदी जी की अपील ही थी।
बिहार की जनता को संंबोधित करते हुए शाह ने कहा कि देश का कोई भी कोना हो, उसके विकास की नींव में बिहार के व्यक्ति के पसीने की महक है। जो लोग उन्हें अपमानित करते हैं वो प्रवासी मजदूरों के जज्बे को नहीं समझते हैं।
शाह ने कहा 'बहुत से लोग गुमराह कर रहे हैं, लेकिन बिहार की जनता और प्रवासी मजदूर इन बातों से अपने को अलग रखें। पूरा देश आपका सम्मान करता हूं। आज इस मंच से कहना चाहता हूं देश का कोई हिस्सा हो, जो विकसित है इसकी नींव में जाएंगे तो बिहार के प्रवासी मजदूरों के पसीने की महक है।
बिहार के व्यक्ति का पसीना इस देश के विकास की नींव में है। जो लोग अपमानित करते हैं उनको मालूम नहीं है कि बिहार के मजदूरों का जज्बा क्या है। वे नहीं जानते हैं कि मोदी जी ने उन्हें सुरक्षित रखने के लिए कितना काम किया। जब से कोरोना की बीमारी आई तो पीएम ने सभी मुख्यमंत्रियों से कहा कि जहां भी प्रवासी मजदूर हैं उनके लिए व्यवस्था की जाए। केंद्र सरकार ने इसके लिए तुरंत 11 हजार करोड़ रुपए दिए।
'एक देश-एक राशन कार्ड'
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नीतीश जी और सुशील जी दोनों प्रसिद्धि करने में थोड़े से कच्चे हैं। वो रोड पर खड़े होकर थाली नहीं बजाते हैं, वो चुपचाप सहायता के लिए काम करने वाले लोग हैं। नितीश जी और सुशील जी के नेतृत्व में बिहार सरकार ने बहुत अच्छे से ये लड़ाई लड़ी है।
मोदी जी ने अभी-अभी गत कैबिनेट में निर्णय लिया की 'एक देश-एक राशन कार्ड'। बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा के मजदूर देश के कई हिस्सों में काम करते हैं। इससे अब श्रमिक भाई-बहन अपने हिस्से का राशन, देश में कहीं पर भी हों वहां से ले सकेंगे।
शाह ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान 1.25 करोड़ प्रवासी मजदूरों को हजारों ट्रेनों के माध्यम से उनके घरों तक पहुंचाया गया है। उनके लिए भोजन की व्यवस्था की गई, पीने के पानी की व्यवस्था की गई। उनके गृह राज्यों में क्वारंटीन की व्यवस्था की गई।
लालटेन युग से एलईडी युग तक आए हैं
शाह ने बिहार की जनता को संबोधित करते हुए कहा 'बिहार में हम लालटेन युग से एलईडी युग तक आए हैं। लूट एंड ऑर्डर से लॉ एंड ऑर्डर तक की यात्रा हमने की है। जंगल राज से जनता राज तक हम आए हैं। बाहुबल से विकास बल तक आए हैं और चारा घोटाले से डीबीटी तक की यात्रा मोदी जी के नेतृत्व में सफलतापूर्वक तय की है।
संबोधन के अंत में शाह ने पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहा 'मैं भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं से कहना चाहता हूं कि ये मोदी जी का आहृवान है कि जब तक कोरोना के खिलाफ लड़ाई चल रही है तब तक 'सेवा ही हमारा संगठन' है। इस मंत्र के साथ हर जरूरतमंद की सेवा करें, जागरूक करें।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की वर्चुअल रैली है जिसे लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेताओं राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव ने बर्तन बजाकर विरोध किया। उन्होंने प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर भी अपनी विरोध दर्ज किया।
इसके अलावा पटना में विभिन्न स्थानों पर सात जून, 2020 को श्रद्धांजलि दिवस बताने वाले पोस्टर लगाए गए हैं। पोस्टर में लिखा है- ‘वर्चुअल से एक्चुअल मुद्दों का एनकाउंटर।’
वहीं, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि कुछ राजनैतिक दल केवल पीएम मोदी और भाजपा का विरोध ही करते हैं। ये वही लोग हैं जिन्होंने कोरोना वॉरियर्स के सम्मान में जब थालियां बजाने के लिए कहा था तो उसका विरोध किया था। आज गरीबों के अधिकार के लिए खुद थालियां बजा रहे हैं।