पंचायतों ने राज्य में 20 लाख मजदूरों के नाम पर दो-दो जॉब कार्ड जारी कर दिये हैं। पंचायत रोजगार सेवकों और प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारियों की इस लापरवाही से ग्रामीण विकास विभाग हैरान है।
इस गड़बड़ी का तब पता चला जब एक-एक जॉब कार्डधारियों के आंकड़े मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एमआइएस) पर अपलोड किये गये। सबसे ज्यादा दोहरे जॉब कार्ड 96 हजार 855 मजदूरों को मुजफ्फपुर जिले में दिये गये हैं। राज्य में मनरेगा के तहत 1.25 करोड़ मजदूरों को जॉब कार्ड दिये गये हैं। जॉब कार्ड देना पंचायतों का काम है।
जॉब कार्ड इसलिए दिया जाता है ताकि मजदूरों के पास किये गये काम, हासिल मजदूरी और बेरोजगारी भत्ते का लिखित ब्योरा रहे। एक जॉबकार्ड न्यूनतम पांच सालों तक वैध रहता है। मजदूरों के पंजीकरण के लिए आवेदन पंचायतों में दिये जाते हैं। पंचायतों की जिम्मेदारी है कि वह आवेदन मिलने के बाद उसका पंजीकरण करे। साथ ही जॉब कार्ड जारी करते वक्त जांच करले कि किसी एक व्यक्ति के नाम पर दो कार्ड न हों। इसके अलावा पंचायत रोजगार सेवक और प्रखंडस्तरीय कार्यक्रम पदाधिकारी की भी मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी है।