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वूमेन्स डेः नारी जो न हारी, चुनौतियों से जीतकर बनीa खिलाड़ी

Sun, 06 Mar 2016 11:05 PM IST
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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वूमेन्‍स डे - फोटो : अमर उजाला
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जो चुनौतियों से हार मान ले वह इंसान ही क्या। यह कहना है पैरा ओलंपिक टेबल टेनिस खिलाड़ी पूनम का। सात साल की उम्र में उन्हें पोलियो हो गया था। सबसे ज्यादा दिक्कत कॉलेज के पढ़ाई में आई। एक क्लास दूसरी मंजिल पर लगती तो दूसरी ग्राउंड फ्लोर पर। पढ़ाई के दौरान ही शादी हो गई। बच्चा भी हुआ, मगर आगे बढ़ने की ललक थी।
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इसके बाद भी लॉ की पढ़ाई कंपलीट की। अब वकालत की प्रैक्टिस करती हैं। पढ़ाई के साथ ही खेलों में हिस्सा लिया। वह देश ही नहीं विदेशों में भी पेरा गेम्स शानदार प्रदर्शन कर कई मेडल जीत चुकी हैं। इस बार वुमन डे पर होने वाली कार रैली में भी हिस्सा ले रही हैं। पूनम का कहना है कि महिलाएं घर से बाहर निकलें। किसी की मोहताज न बनें। चुनौतियां आपको मजबूत करती हैं।

अटूट निशाने में माहिर, देश विदेश में लोकप्रिय

वूमेन्‍स डे - फोटो : अमर उजाला
देश और चंडीगढ़ की बेहतरीन शूटरों में शामिल है अंजुम मोदगिल। ओलंपियन अंजिल भागवत को नेशनल में हरकार गोल्ड मेडल जीत कर सुर्खियां बटोर चुकी हैं। पिछले महीने  साउथ एशियन गेम्स में अंजुम मोदगिल ने शूटिंग में एकल वर्ग में गोल्ड जीता। इसी केसाथ वह गेम्स में शूटिंग में गोल्ड जीतने वाली सिटी ब्यूटीफुल की एकमात्र खिलाड़ी बनी।

अंजुम मोदगिल ने राइफल इवेंट में 50 मीटर थ्री पी में गोल्ड मेडल पर निशाना साधा दिया। अंजुम की मां शुभ मोदगिल भी अपने समय में शानदार शूटर थी। इन्हीं से प्ररेणा पाकर ही अंजुम ने भी शूटिंग को अपने केरियर केरुप में चुना।

अंजुम ने कहा कि एक  महिला होने के नाते मुझे अपनी मां पर फर्क है जिनके बिना आज इस मुकाम तक पहुंचना संभव नही था। अंजुम मोदगिल एनसीसी की कैडेट है। देश केरक्षामंत्री इस शूटर को  प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित कर चुके है।

तलवार बाजी में तलवार की चमक बिखने में लगी

वूमेन्‍स डे - फोटो : अमर उजाला
देश भर में अपनी तलवारबाजी का हुनर दिखाने में लगी हुई है। सिटी की फेंसिंग खिलाड़ी कशिश शर्मा। चितकारा इंटरनेशनल स्कूल की 15 वर्षीय छात्रा है और तलवारबाजी की माहिर खिलाड़ी है। देश ही नही विदेशों में भी अपनी छाप छोड़ चुकी है।  नेशनल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हुए सिटी के लिए कई मेडल जीतने में कामयाब रही हैं।

हाल ही में बाल दिवस पर दिल्ली में राष्ट्रपति के हाथों सम्मान पा चुकी हैं। कशिश ने बताया कि महिला होने केनाते मुझे अपने आप पर गर्व महसूस होता है। मैं चाहती हूं देश की सभी महिलाएं पढ़े लिखे और स्पोर्ट्स में आगे बढ़कर अपने माता पिता का नाम रोशन करे।

कशिश भविष्य में फेंसिंग की नेशनल टीम की कप्तान बनकर देश केलिए मेडल जीतना चाहती हैं। इसके साथ ही अपने साथ पढ़ने वाली छात्राओं को तलवारबाजी के गुर सीखाना चाह रही है ताकि वह अपनी सुरक्षा खुद कर सके। कशिश नेशनल स्तर पर 35 से अधिक मेडल जीत चुकी है। स्कूल की दस छात्राओं को भी सिखा रही हैं।
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हर तीर निशाने पर, धनुर विद्या सीखाने में लगी

वूमेन्‍स डे - फोटो : अमर उजाला
अर्जुन की तरह तीर निशाने पर साधने की शिक्षा दे रही है आर्चरी कोच सुमंगला। शहर में लेक स्थित स्पोर्ट्स क्लब में आर्चरी सेंटर में बतौर मुख्य कोच के पद पर तैनात है। सुमंगला 2004 में एथेंस ओलंपिक में भारतीय आर्चरी टीम की ओर से हिस्सा ले चुकी है।

देश की जूनियर आर्चरी टीम की कोच के पद पर भी रह चुकी हैं। इन्होंने बताया कि महिला होने केनाते  मेरी कोशिश रहती है आर्चरी में अधिक से अधिक खिलाड़ी देश केलिए उपलब्ध कर संकू। सुमंगला खुद आर्चरी खिलाड़ी रहते हुए तीन बार नेशनल चैंपियन रही है।
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