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स्पेशल बच्चों की स्पेशल मां कैसे बनीं स्वाती शर्मा, जानें कहानी

Tue, 15 Mar 2016 06:10 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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स्वाती शर्मा, प्र‌िंस‌िपल आशा ज्योत‌ि स्कूल - फोटो : Amar Ujala
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किसी भी महिला के लिए पहली बार मां बनना एक अलग अहसास होता है, हर पल स्फूर्ति देता है और बच्चे का पूरा भविष्य सपनों में ही आकार लेने लगता है, लेकिन यदि पहली ही संतान एक लाइलाज बीमारी के साथ पैदा हो तो मजबूत से मजबूत इंसान भी टूट जाता है।
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पर, स्वाति शर्मा नहीं टूटीं। आशा ज्योति स्कूल की प्रिंसिपल स्वाति शर्मा के बेटे अंतरिक्ष के दिल और तालू में छेद था। ब्रेन डैमेज हो चुका था। अंतरिक्ष साढ़े पांच साल का हुआ तो वह उसे लेकर आशा ज्योति स्कूल पहुंची और दाखिला कर दिया। 

बेटे के कारण वे हर रोज वहां जाती थीं। उस समय मोहिनी पंत प्रिंसिपल हुआ करती थीं। उन्हीं की प्रेरणा से वे वहां वॉलेंटरी सर्विस देने लगीं। धीरे-धीरे यह जुड़ाव बढ़ता गया और अपने बेटे के साथ-साथ वहां रहने वाले हर स्पेशल चाइल्ड की विशेष मां बन गईं। उनकी निष्ठा देख मोहिनी पंत ने उन्हें स्कूल के हर कार्यक्रम में शामिल करना शुरू कर दिया। 
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2006 में जब मोहिनी पंत का निधन हो गया तो स्वाति को प्रिंसिपल बना दिया गया। कभी पढ़ाई छोड़ चुकीं स्वाति अब ऑटिज्म में डिप्लोमा कर रही हैं। शायद ईश्वर का कोई संदेश है यह कंजीनाइटल एबनॉर्मेलिटीज लाखों बच्चों में से किसी एक होती है। 

बेटे अंतरिक्ष का ब्रेन ऑक्सीजन की कमी से डैमेज हो चुका था। पैर भी छोटा-बड़ा था और हड्डियों की बीमारी भी थी। कहती हैं कि अंतरिक्ष की मां बनाकर ईश्वर ने शायद उन्हें एक संदेश दिया था और यही वजह है कि वे आशा ज्योति से जुड़ी हैं। कहती हैं कि इन बच्चों का आईक्यू लेवल कम है, लेकिन इन्हें प्यार की दरकार है।
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