‘आकाश मेरे लिए छत है और जमीन विस्तर। बड़ी मुश्किल से दो वक्त का निवाला मिलता है। महीने में कई दिन ऐसे भी होते हैं, जब रोटी को पानी में नमक घोलकर खाना पड़ता है। उस दिन मां बापू भूखे सोते हैं। हमें दिखाने के लिए बापू रोटी का एक टुकड़ा तो जरूर तोड़ते हैं, लेकिन जब तक वह एक निवाला खाते हैं तब तक हम भर पेट खाना खा चुके होते हैं। बापू ऐसा इसलिए करते हैं कि हम भूखे न रह जाएं। समझ सब कुछ आता है पर क्या करें। ये तो गरीबी की मार है। इसमें तपना हमने भी सीख लिया है। अब तो आगे ही बढ़ना है।’
यह दर्द भरी कहानी है 7वीं नार्थ जोन ताइक्वाडो चैंपियनशिप में ब्रांज मेडल विजेता पंचकूला निवासी 12 वर्षीय पायल की। अब पायल नेशनल चैंपियनशिप में उत्तर भारत का प्रतिनिधित्व करेगी। वह पंचकूला सेक्टर-4 के गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल में दूसरी कक्षा की छात्रा है। पढ़ाई के लिए स्कूल से ही किताबें और ड्रेस मिल जाती है। सपना है ओलंपिक में मेडल जीतकर देश का प्रतिनिधित्व करना। मात्र एक माह की ट्रेनिंग में पायल ने नार्थ जोन में यह मेडल हासिल किया है।
फुटपाथ पर कटती हैं राते
सेक्टर-5 के केसी सिनेमा के पीछे फुटपाथ पर पायल अपने माता-पिता और दो भाईयों के साथ रहती है। पिता मजदूरी करते हैं, तो दो वक्त की रोटी नसीब होती है। कई बार पिता की तबीयत खराब होने पर भूखे पेट भी सोना पड़ता है।
इस परिवार के पास रहने को अपना घर नहीं है। रात को अक्सर शोरूम के बाहर नीले गगन के नीचे पिछले दस सालों से तारों से बात कर पायल के परिवार के सदस्य रातें काटतें हैं, सुबह होते ही पायल की मां बिस्तर लपेटकर पेड़ के नीचे पॉलिथीन से ढ़क देती है। सुबह दुकान खुलने से पहले सड़कों पर खाना भी पका लेती है। सभी खाना खाते हैं और पिता मजदूरी के लिए बेटी को स्कूल छोड़ते हुए निकलते हैं। अभी पायल के दोनों भाई बहन छोटे हैं। वह स्कूल नहीं जाते।
कोच अमिता मारवाहा का रहा विशेष सहयोग
अमिता मारवाहा पंचकूला में झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चों को फ्री में मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देती हैं। इस नार्थ जोन चैंपियनशिप में अमिता ने भी स्वर्ण पदक हासिल किया है। इस समय उनके पास तीन सौ बच्चे हैं। इन सभी बच्चों को वह फ्री में मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देती हैं। पायल को उन्होंने किट भी खरीद कर दिया है। इन बच्चों को ट्रेनिंग देने के लिए सेक्टर-4 गवर्नमेंट स्कूल की प्रिंसिपल ऊषा गुप्ता ने स्कूल में ही जगह दिया है। ताकि ऐसे बच्चे आगे बढ़ सकें।