कठुआ के गोविंदसर इलाके के रहने वाले शशि ने सामाजिक सरोकारों को जीवित रखते हुए कई बेसहारा लोगों के लिए उम्मीद की मशाल जलाई है।
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न तो आय का साधन है और न ही कोई जमीन जायदाद लेकिन शशि का दिल हर गरीब और जरूरतमंद की मदद के लिए धड़कता है। कठुआ के गोविंदसर इलाके के रहने वाले शशि ने सामाजिक सरोकारों को जीवित रखते हुए कई बेसहारा लोगों के लिए उम्मीद की मशाल जलाई है।
अपने परिवार की आर्थिक परिस्थितियों को नजर अंदाज करते हुए शशि शर्मा पिछले पच्चीस सालों से समाज सेवा में जुटे हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। क्षेत्र में नशा मुक्ति के उद्देश्य से समाज सेवा की ओर बढ़े शशि शर्मा सैंकड़ों परिवारों की उम्मीद हैं।
इनमें वो परिवार भी शामिल हैं जिन्हें आजतक यह भी नही पता कि उनके बच्चे किस रहस्यमय बीमारी से जूझ रहे हैं। यही नहीं क्षेत्र में गरीबी और पिछड़ेपन को काफी नजदीक से महसूस करने वाले शशि ने यह कसम भी खाई है कि जबतक गांव का हर व्यक्ति की जिंदगी में सुधार नही होता वो कोई त्यौहार भी नही मनाएंगे। ऐसे में हर साल दिवाली को वो सिर्फ घर पर पूजा कर क्षेत्र के बच्चों के लिए प्राथर्ना करते हैं।
ढ़ाई दशक पूर्व गरीबी और शराब के नशे की चपेट में जा रहे कठुआ के गोविंदसर गांव के लोगों में परिवर्तन लाने का सपना शशि शर्मा ने देखा और उसे काफी हद तक साकार भी किया। शशि ने न सिर्फ युवाओं में राष्ट्रीय एकता की भावना का संचार किया बल्कि समाज के सामने एक मिसाल भी बने।
अबतक लोगों के सहयोग आधा दर्जन के करीब गरीब बेसहारा लड़कियों के विवाह आयोजनों में आर्थिक सहायता देने के साथ ही उन्होंनें गांव में सिलाई सेंटर खोलकर सौ से अधिक युवतियों को आत्मनिर्भर बनने की ओर भी प्रेरित किया है। पर्यावरण संरक्षण के लिए मुहिम चलाकर विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में एक हजार से अधिक पौधे लगाने में उनकी अहम भूमिका है। 1999 में शशि को सरकार की ओर से विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के लिए जिला युवा पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।
किसी भी आम जन की समस्या के समाधान के लिए तत्पर रहने वाले शशि की पारिवारिक परिस्थितियों उनकी चुनौतियों के ठीक विपरीत हैं लेकिन उन्होंने कभी हार नही मानी। इन दिनों शशि गोविंदसर गांव में उन दर्जनों बच्चों के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं जिन्हें खुद अपनी बीमारी तक का नही पता है। उनकी यह मेहनत रंग भी लाने लगी है। शोध का काम तेज हो गया है जिससे ड़ेढ़ दशक बाद ही सही लेकिन रहस्यमय बिमारी के कारणों का पता चलने की उम्मीद बंध गई है।