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एलप्स के बाद माउंट एवरेस्ट जीतने का लक्ष्य, मगर पैसा नहीं

Tue, 22 Mar 2016 01:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, धर्मशाला
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आकृति हीर - फोटो : अमर उजाला
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सरकार के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के सभी नारे विश्व भर में हिमाचल का नाम रोशन करने वाली आकृति हीर के आगे फेल हो रहे हैं। 2014 में 20 वर्ष की उम्र में बैंक से लोन लेकर यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलप्‍स पर चढ़ाई कर लिम्का बुक में नाम दर्ज करवाने वाली हीर की सरकार अभी भी अनदेखी कर रही है।
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आकृति (22) ने माउंट एवरेस्ट को फतह करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन इसे पूरा करना मुश्किल हो गया है। इसके लिए आकृति के पास न पर्याप्त धन है और न ही संसाधन। आकृति ने धर्मशाला में प्रेस वार्ता में कहा कि 2012 में नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग उत्तरकाशी से उन्होंने पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लेकर माउंट एलबस की चोटी फतह की।

2015 में प्राइड ऑफ हिमाचल और 2016 में प्राइड ऑफ नेशनल का अवार्ड जीता। वह प्रदेश सरकार की अनदेखी से निराश हैं। कहा कि पंजाब और हरियाणा के उनके साथ के पर्वतारोही को वहां की सरकार ने अच्छी नौकरी के साथ आर्थिक सहायता दी है।
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एवरेस्ट फतह के लिए चाहिए इतना पैसा

हीर ने कहा कि माउंट एवरेस्ट फतह करने के लिए संसाधन जुटाने को 20 लाख नहीं हैं। उनकी तरह कई बेटियां हैं, जो पर्वतारोहण में सूबे का नाम विश्व में चमका सकती हैं।
हीर ने कहा कि माउंट एवरेस्ट फतह करने के लिए संसाधन जुटाने को 20 लाख नहीं हैं। उनकी तरह कई बेटियां हैं, जो पर्वतारोहण में सूबे का नाम विश्व में चमका सकती हैं, लेकिन संसाधनों की कमी से ऐसा नहीं कर पा रही हैं। मांग की कि सरकार पर्वतारोहियों को नौकरी के साथ आर्थिक सहायता भी दे।

हीर स्कूल स्तर से ही थी हीरा
आकृति हीर के पिता कृष्ण चंद अध्यापक हैं और माता सर्वजीत कौर गृहिणी हैं। हीर की स्कूली पढ़ाई रावमापा सुल्याली से हुई है। स्कूल स्तर पर एनएसएस बेस्ट वालंटियर, बैडमिंटन और क्रिकेट खिलाड़ी रही हैं। हीर ने आदर्श भारतीय कॉलेज पठानकोट से बीसीए की है।

जीएनडीयू में बेस्ट सिंगर रही हैं। एनसीसी में डॉयरेक्टोरेट स्तर पर बेस्ट कैडेट्स रही हैं। हीर की बहन स्मृति हीर एमएससी कर रही हैं, जबकि भाई समृद्ध मैट्रिक की पढ़ाई कर रहा है।
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