अपनी तेजतर्रार तलवारबाजी के दम पर न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी इतना नाम कमाया कि राष्ट्रपति के हाथों नेशनल अवार्ड मिला। बात कर रहे हैं चंडीगढ़ की तलवारबाज कशिश मित्तल की, जो ऐसी तलवारबाज हैं कि विरोधी उनका सामना करने से पहले ही हार मान लेता है। अब वे इस खेल को दूसरी लड़कियों को भी सिखा रही हैं, ताकि वे भी आगे चलकर देश का नाम रोशन कर सकें।
तलवारबाजी में शानदार उपलब्धियों के कारण पिछले साल राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी कशिश शर्मा को बाल दिवस पर नेशनल अवार्ड देकर सम्मानित कर चुके हैं। इसमें उनको मेडल, सर्टिफिकेट और दस हजार रुपये सम्मान के रूप में प्राप्त हुए थे। अवार्ड समारोह सेरेमनी का आयोजन दिल्ली में राष्ट्रपति हाल में किया गया था। सेरेमनी में जानी मानीं हस्तियां पहुंचीं थीं, जिनमें केंद्रीय मंत्री मेनका गांघी भी मौजूद रही।
पढ़ाई के साथ साथ स्पोर्ट्स में भी आगे
चितकारा स्कूल की 11वीं की 15 वर्षीय छात्रा कशिश शर्मा तलवारबाजी के माहरत हासिल करने केसाथ साथ पढ़ाई में भी आगे रहती हैं। पढ़ाई केसाथ स्कूल में आयोजित कई एकेडमिक कार्यक्रमों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेती आ रही हैं।
बास्केटबाल से शुरू किया करियर
कशिश पहले स्कूल में बास्केटबाल खेलती थीं। इसके बाद तलवारबाजी की और झुकाव हो गया। इसकी शुरुआत उस समय रंग लाई जब इस युवा खिलाड़ी ने नेशनल प्रतियोगिता में मेडल जीते। इसके बाद इसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज देश में नही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जूनियर फेसिंग टीम की सदस्य बनकर खेलती हैं।
रोजाना कई घंटों की मेहनत ने पहुंचाया
कशिश भारतीय टीम की पूर्व कप्तान और सिटी में तलवारबाजी की एकमात्र एके डमी की कोच चरणजीत कौर से ट्रेनिंग लेती हैं। कोच के अनुसार वह काफी होनहार खिलाड़ी हैं। रोजाना कई घंटों के अभ्यास ने आज यह खिलाड़ी लगातार आगे पहुंच रही हैं।
उपलब्धियां- 2015 मेंआबू धाबी मे कैडेट जूनियर एशियन चैंपिनयशिप में 7वीं रैंक
- 2015 मे साउथ अफ्रीका के कैप टाउन मे कामनवेल्थ गेम्स में 4थी रैंक
नेशनल- 35 मेडल जीत चुकी हैं। इसमें 13 स्वर्ण, 13 रजत, 9 कांस्य पदक शामिल हैं। वहीं स्टेट लेवल पर 9 स्वर्ण, 7 रजत, 4 कांस्य पदक शामिल हैं।