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हिमाचल की बेटियों ने रोशन किया नाम, सेना में बनीं लेफ्टिनेंट

Sun, 05 Mar 2017 08:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हमीरपुर
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इंदिरा गांधी राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल शिमला की स्टाफ नर्स आर्मी में लेफ्टिनेंट बन गई हैं। भारतीय सेना के मिलिट्री नर्सिंग सर्विस परीक्षा में चयन के बाद ज्योति चौधरी को पश्चिम बंगाल स्थित 164 मिलिट्री हॉस्पिटल में ज्वाइनिंग मिली है। ज्योति चौधरी मूलतया हमीरपुर जिले के उपमंडल भोरंज के गांव चमयोग, सुलखान की रहने वाली हैं। ज्योति की प्रारंभिक स्कूली शिक्षा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मनोह भोरंज में ही हुई है।
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साइंस विषय में बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद ज्योति चौधरी ने बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई की। इसके बाद आईजीएमसी शिमला में स्टाफ नर्स के पद पर सेवाएं दीं। ज्योति ने बताया कि उन्होंने बीते वर्ष मिलिट्री नर्सिंग सर्विस परीक्षा दी थी। इसमें सफलता हासिल करने के बाद उन्हें पश्चिम बंगाल स्थित 164 मिलिट्री हॉस्पिटल में ज्वाइनिंग मिली है। ज्योति के पिता देसराज चौधरी ऊना जिला के पशु औषधालय में चिकित्सक हैं, जबकि माता पिंकी देवी गृहिणी हैं। ज्योति के भाई भारतीय डाक विभाग में सेवारत हैं। बेटी की सफलता पर परिवार में खुशी का माहौल है।
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शिमला के केल्टी की दीप्ति बनीं लेफ्टिनेंट

शिमला के केल्टी क्षेत्र की दीप्ति शर्मा पुत्री एचसी शर्मा भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गई हैं। दीप्ति की बड़ी बहन कुमुद शर्मा पीजीआई चंडीगढ़ में सेवारत हैं। दीप्ति ने बताया कि उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा चैप्सली स्कूल लोंगवुड और बीएससी की डिग्री आईजीएमसी शिमला से पूरी की है। दीप्ति ने भारतीय सेना में भर्ती की परीक्षा लखनऊ में 2016 में दी थी।

उसके बाद नई दिल्ली में सेना के बेस अस्पताल में साक्षात्कार और चिकित्सा जांच के बाद इस पद के लिए चयन हुआ है। अब वे सेना के अस्पताल जबलपुर (मध्य प्रदेश) में आठ फरवरी को ज्वाइन करेंगी। दीप्ति ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी दिवंगत माता और उनके पिता एचसी शर्मा को दिया।

एचसी शर्मा महिला एवं बाल विकास विभाग में बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर धर्मपुर (सोलन) में कार्यरत हैं। दीप्ति ने कहा कि सेना में भर्ती होना उनका सपना था। उनके पिता एचसी शर्मा ने बताया कि जब उनके घर में पहली बेटी ने जन्म लिया तो उनका सारा परिवार बहुत खुश था। बेटे से भी बढ़कर घर में खुशियां मनाई गईं।

जब दूसरी बेटी दीप्ति ने जन्म लिया तो उनके परिवार की खुशियां दोगुनी हो गईं और बड़ा समारोह आयोजित किया गया। वे स्वयं तीन भाई हैं। उनकी कोई बहन नहीं थी। आज अपनी बेटियों की सफलता पर उन्हें गर्व है। समाज को बेटी से भेदभाव नहीं करना चाहिए। 
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आईजीएमसी की नर्स प्रिया कौंडल बनीं सेना में लेफ्टिनेंट

राजधानी की बेटी प्रिया कौंडल ने पहले प्रयास में मिल्ट्री नर्सिंग सर्विस कमीशन को पास कर लिया है। दिसंबर माह में ही आईजीएमसी में बतौर स्टाफ नर्स पदभार संभालने वाली प्रिया कौंडल आठ फरवरी को मिल्ट्री सर्विस में लेफ्टिनेंट (मेडिकल) के पद पर ज्वाइनिंग देंगी। बेटी की इस उपलब्धि पर माता चंचल कौंडल और दो बहनों की खुशी का ठिकाना नहीं है।

2015 में बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रिया लगातार नर्सिंग जॉब के लिए होने वाली परीक्षाओं के लिए तैयारियों में जुट गई। सितंबर माह में प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड एसएसबी हमीरपुर की ओर से करवाई गई नर्सिंग पोस्ट की लिखित परीक्षा और अक्तूबर माह में साक्षात्कार में अपीयर हुई। दिसंबर माह में प्रिया ने आईजीएमसी में स्टाफ नर्स के पद पर ज्वाइन किया। 

प्रिया ने सफलता के लिए माता चंचल कौंडल की कड़ी मेहनत और बहनों के सहयोग को श्रेय दिया है। सिर से पिता का साया छिन जाने के बावजूद स्व. जेएस कौंडल और माता चंचल कौंडल की बेटी ने प्रतिभा को साबित किया है। प्रिया ने बताया कि पहली बार उन्होंने मिल्ट्री नर्सिंग सर्विस कमीशन दिया, पहली बार में ही उसे सफलता मिली है।
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