पंचकूला की 'जूनियर मैरीकॉम' नंदिनी
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जूनियर मैरीकॉम के नाम से पहचानी जाने वाली पंचकूला की नंदिनी ने 61वें नेशनल स्कूल गेम्स में लगाया गोल्डन पंच। दरअसल खेल के मैदान में पहला पंच जड़ते ही लोग कहते हैं बॉक्सिंग रिंग में जूनियर मैरीकॉम आ गई है। पूरे प्रदेश में पंचकूला की नंदिनी को लोग प्यार से जूनियर मैरीकॉम बुलाते हैं। बुलाए भी क्यों न।
नंदिनी ने महज तीन माह के खेल कैरियर में नेशनल जैसे गेम्स में गोल्डन पंच जो लगाया था। फिर एक बार स्कूल नेशनल चैंपियनशिप में नया इतिहास बनाकर लौटी है। अभी 14 से 19 मई तक आनंदपुर साहिब में आयोजित 61वें नेशनल स्कूल गेम्स में अंडर 17 आयु वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया है। इस चैंपियनशिप में 47 राज्यों के टीमों ने हिस्सा लिया था। स्कूल नेशनल के बॉक्सिंग इवेंट में नंदिनी ने प्री क्वार्टर में महाराष्ट्र क्वार्टर फाइनल में पंजाब, सेमी फाइनल में दिल्ली और फाइनल में नंदिनी ने तेलांगना को हराकर चैंपियन ट्राफी पर कब्जा किया।
पिता से मिली बॉक्सिंग की सीख
पिछले डेढ़ साल से नंदिनी अपने पिता अरविंद ठाकुर से बॉक्सिंग की ट्रेनिंग ले रही है। अरविंद भी नेशनल बॉक्सर रह चुके हैं। वह अपनी बेटी को वर्ल्ड चैंपियन का खिताब हासिल करते देखना चाहते हैं। नंदिनी अपने पिता को अपना रोल मॉडल मानती है, लेकिन मैरीकॉम की तरह बेस्ट इंटरनेशनल बॉक्सर बनना चाहती है। अब इंटरनेशनल चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए बॉक्सिंग कोच प्रमोद नेगी से बॉक्सिंग की तकनीकी शिक्षा हासिल करने में जुटी है।
नेशनल चैंपियन को शिक्षा विभाग ने अनदेखा किया
नंदिनी की मां अरविंदर ठाकुर ने बताया कि आठ माह पहले नंदिनी ने जिला विद्यालय क्रीड़ा प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। उसे नेशनल और स्टेट के स्पोर्ट्स प्रमाण पत्र मिल गए। लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से जिला विद्यालय क्रीड़ा प्रतियोगिता का सर्टिफिकेट्स अब तक नहीं मिला। पिछले एक माह से वह जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के चक्कर लगा रही हैं। लेकिन उन्हें बार बार लौटाया जा रहा है। अरविंदर ने बताया कि अगर 31 मई तक नंदिनी ने स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई नहीं किया तो उसे स्कॉलरशिप नहीं मिल पाएगी। स्कॉलरशिप लेने के लिए नंदिनी को जिला विद्यालय क्रीड़ा प्रतियोगिता का सर्टिफिकेट नेशनल और स्टेट के साथ दाखिल करना होगा।