जसविंदर कौर के खून से कब्बू को नई जिंदगी मिली।
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कैंसर से पीड़ित सात साल के कब्बू के परिजन डेराबस्सी मोहाली की जसविंदर कौर का अहसान जिंदगी भर नहीं भुला सकेंगे। चंबा के गरीब परिवार के कब्बू नामक इस मासूम के लिए जसविंद्र कौर फरिश्ता बनकर आईं। एक्यूट लेम्फोसिटिक लेक्यूमिया (एएलएल) कैंसर से पीड़ित कब्बू के इलाज के लिए खून की सख्त दरकार थी। आईजीएमसी में बी नेगेटिव खून नहीं मिला। ऐसे में कब्बू की हालात खराब होने लगी थी। अस्पताल प्रबंधन ने टेलीविजन के जरिये कब्बू के लिए खून दान करने की अपील की।
डेराबस्सी की जसविंदर ने टीवी पर यह अपील सुनी और पति से कहा कि वे बच्चे की मदद करना चाहती हैं। इस पर पति भी तैयार हो गए और दोनों ने शिमला के आईजीएमसी अस्पताल जाने की ठान ली। दोनों उसी दिन बस में बैठे और शिमला पहुंच गए। अस्पताल जाकर दोनों ने कब्बू के बारे में जानकारी हासिल की और खून देने की इच्छा जाहिर की। जब ब्लड बैंक में महिला का पता पूछा गया तो हर कोई हैरान रह गया। महिला पंजाब के डेराबस्सी की रहने वाली थी। महिला के इस जज्बे को हर कोई सराह रहा था। जसविंदर कौर के खून से कब्बू को नई जिंदगी मिली। बकौल जसविंदर टीवी पर कब्बू के बारे में सुनकर उनसे नहीं रहा गया। वो हर हालात में इस मासूम की मदद करना चाहती थी। इसलिए शिमला पहुंच गईं।
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चिल्ड्रन वार्ड में एडमिट है कब्बू, आप भी कर सकते हैं मदद
आईजीएमसी के चिल्ड्रन वार्ड में गरीब बच्चे का उपचार चल रहा हैं। आईजीएमसी में बच्चे का डेढ़ साल पहले भी इलाज किया गया था। बच्चे में खून के प्लेटलेटस कम होने के कारण उसे ट्रीटमेंट देना मुश्किल होता है। कैंसर होने के कारण खून की अत्यधिक जरूरत पड़ रही है। शिमला में चल रही ‘बी नेगेटिव’ खून की शार्टेज के कारण आम जनता से प्रशासन ने अपील है, कि जिन लोगों का ब्लड ग्रुप ‘बी नेगेटिव’ है। वे अस्पताल के ब्लड बैंक आकर तथा रक्तदान शिविर में रक्तदान कर सकते हैं।
पीडियाट्रिक्स विभाग के प्रोफेसर डॉ. अश्विनी सूद ने बताया कि बच्चे को समय समय पर खून उपलब्ध करवाया जा रहा है। वही डॉक्टरों की निगरानी में उसका उपचार चल रहा है।
मरीजों को उपलब्ध करवाया जा रहा खून
आईजीएमसी ब्लड बैंक के विभागाध्यक्ष डॉ. मदन कौशल ने बताया कि स्टॉक में जो ब्लड है वह मरीजों को दिया जा रहा है।