कैप्टन दिव्या शर्मा वैसे तो एक एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर हैं और वे 19 यूपी गर्ल्स बटालियन, एनसीसी की कार्यवाहक कमांडिंग ऑफिसर भी हैं।
लेकिन वे एक कुशल गृहिणी भी हैं और मां भी. सुबह बच्चों को स्कूल भेजने के साथ उनके दिन की शुरुआत होती है।
घर की जिम्मेदारियों को पूरा करने के बाद यूनिफॉर्म पहनते ही वह एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर की भूमिका में होती हैं। फिर यूनिट कैडेट के इनरोलमेंट का काम हो या ट्रेनिंग, स्टाफ के मैनेजमेंट या फिर वाहनों व हथियारों की मेंटेनेंस, अपनी सारी जिम्मेदारियां वह बखूबी निभाती हैं।
अपनी दोहरी भूमिका के सवाल पर कैप्टन दिव्या कहती हैं, "यदि आपको अपनी जिम्मेदारी का अहसास है और खुद पर भरोसा है तो कहीं संघर्ष के लिए जगह ही नहीं बचती।"
वह आईपीएस बनना चाहती थीं, लेकिन नहीं बन सकीं तो इस ओर चली आईं। हालांकि ऐसे काम महिला के लिए नहीं माने जाते लेकिन वह मानसिक तौर पर खुद को तैयार कर चुकी थीं.
गजब का आत्मविश्वास और अनुशासन उनकी चाल-ढाल में ही झलकता है। जितनी चेहरे पर सौम्यता है उनके इरादे उतने ही मज़बूत दिखाई देते हैं। वह कहती हैं, "महिला है, इसलिए सफल हो गई, यह एक सामान्य सी सोच है। इस सोच को बदलने के लिए, अपने काम से जवाब दो।"