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मिसाल : लाखों की नौकरी छोड़ IIT पास आउट दोस्तों ने शुरू किया स्टार्टअप

Sun, 15 May 2016 12:12 AM IST
यशलोक सिंह/अमर उजाला, गुड़गांव

सार

  • जून, 2015 में शुरू की थी पिकअप की प्लानिंग
  • स्टार्टअप को अप्रैल में लॉच किया गुड़गांव में 
  • यह स्टार्टअप रियल टाइम में देता है राइड शेयरिंग का विकल्प
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स्टार्ट अप शुरू करने वाले दोस्त - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पांच दोस्त चंद्रसेन विक्रम, अमित भसीन, रामिल बंसल, अभिषेक जैन और आशीष गुप्ता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्टार्टअप इंडिया के सपने को साकार करने में जुट गए हैं। आईआईटी रुड़की से 2010 में इंजीनियरिंग पास आउट इन दोस्तों ने अपनी लाखों की नौकरी छोड़ कुछ अलग कर दिखाने के जब्बे के साथ अपना पिकअप नाम से स्टार्टअप शुरू किया। 
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उनका यह स्टार्टअप लोगों को रियल टाइम में राइड शेयरिंग (कार, कैब और ऑटो) का मोबाइल ऐप के जरिए विकल्प देता है। इनका कहना है कि यह स्टार्टअप सिर्फ प्रॉफिट मेकिंग वाला नहीं है। यह सामाजिक सरोकार से भी जुड़ा है। इन दोस्तों ने पिकअप की प्लानिंग जून, 2015 में की थी।

मगर यह परवान चढ़ा अप्रैल, 2016 में। इसे इसी माह 15 अप्रैल को गुडग़ांव में लॉच किया गया। इसके लिए गुड़गांव में ऑफिस की तलाश की जा रही है। रामिल बंसल का कहना है इस स्टार्टअप का गुड़गांव  पर विशेष फोकस है। क्योंकि यह दिल्ली-एनसीआर के सभी शहरों से गहराई से जुड़ा है।
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यहां 250 फार्चून-500 कंपनियां हैं। यह कॉरपोरेट, आईटी और बीपीओ का बढ़ा हब है। यहां देश की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री है। इन कंपनियों में लाखों लोग रोजाना जॉब करने दिल्ली-एनसीआर से आते हैं। ऐसे में पिकअप के लिए इससे बेहतर डेस्टिनेशन नहीं हो सकता है।

पांचों दोस्तों का कहना है जब वह एक साथ आईआईटी रुड़की में पढ़ाई कर रहे थे, तभी से यह मन में था कि मिलकर कुछ ऐसा करना है जो विशेष हो। पढ़ाई पूरी होने के बाद सभी ने अगल-अलग कंपनियों में अच्छे पद काम भी करने लगे। मगर मन में कुछ अलग करने का हौसला कम नहीं हुआ।

रामिल बंसल - फोटो : अमर उजाला
सभी दोस्त एक दिन एक साथ बैठे और काफी विचार के बाद पिकअप की प्लानिंग सामने आई। इसके लिए उन्हें प्रेरित किया दिल्ली-एनसीआर की ट्रैफिक समस्या ने। सभी का कहना था कि सड़कों पर रोजाना घंटों जाम, प्रदूषण और वाहनों की बढ़ती संख्या से स्थिति दिनों दिन खराब हो रही है। अगर इससे लोगों को छुटकारा देना है तो पिकअप का आइडिया कारगर होगा। फिर क्या था शुरू हो गया यह काम।

खुद बनाया पिकअप मोबाइल ऐप
इन दोस्तों ने खुद ही पिकअप मोबाइल ऐप बनाया और इसे लांच किया। आज दिल्ली एनसीआर में इनके 500 से अधिक कस्टमर हो चुके हैं। ये वह सभी हैं जो अपनी कार, कैब और ऑटो एक दूसरे के साथ शेयर करते हैं। इसके बदले में इन्हें पैसे भी मिलते हैं।

क्या है पिकअप
पिकअप रियल-टाइम राइड शेयरिंग प्लेटफार्म है। जिसमें लोग मोबाइल ऐप के माध्यम से एक दूसरे के साथ ऑनलाइन जुड़ते हैं। लोग एक दूसरे साथ अपनी कार, कैब और ऑटो शेयर कर सहयात्री बनते हैं। उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति अपनी कार द्वारा गुड़गांव से कनाट प्लेस तक जा रहा है तो इस ऐप पर वह अपने यात्रा की पूरी जानकारी डाल देता है।

अमित भसीन - फोटो : अमर उजाला
उसे यह भी बताना होता है कि वह कार की कितनी सीट शेयर करना चाहता है। अगर उस रूट पर कोई और जा रहा होता है तो सीट शेयर करने वाले के मोबाइल पर अलार्म बजने के साथ सहयात्री की पूरी जानकारी उसकी फोटो और प्रोफाइल के साथ आ जाती है। इसके बदले सहयात्री प्रति किलोमीटर पांच रुपये के हिसाब से पेटीएम द्वारा पिकअप को देता है। पिकअप इसमें से 20 फीसदी राशि काट अपना वाहन शेयर करने वाले के पेटीएम वॉयलेट में डाल देता है।   सुरक्षा का प्रबंध पिकअप स्टार्टअप शुरू करने वालों का कहना है कि राइड शेयरिंग करने वालों की पूरी जानकारी उनके पास होती है। वह कहां काम करने हैं, कहां के रहने वाले, उनकी प्रोफाइल क्या है। किसी आपराधिक मामले में शामिल तो नहीं हैं इसकी पूरी जानकारी होने के बाद ही पिकअप उन्हें अपने साथ जोड़ता है। जो अपनी कार, कैब या ऑटो किसी के साथ शेयर करता है तो उसकी पूरी जानकारी फोटो सहित अपने दोस्त या घरवालों को भी भेज सकता है।   पिकअप में कैसे होता है रजिस्ट्रेशन...
सबसे पहले उपभोक्ता को गूगल स्टोर से पिकअप मोबाइल ऐप डाउनलोड करना होगा
इसके बाद इसे अपने फेसबुक से कनेक्ट करना होता है
फिर अपनी जन्मतिथि का ऑनलाइन वेरीफिकेशन कराना होगा 
अगले चरण में जिस कंपनी में कार्यरत हैं उसका नाम व वहां अपना पद बताना होगा 
संस्थान का ईमेल आईडी (डोमेन नेम वाली ईमेल) जिस पर पिकअप वेरीफिकेशन कोड भेजता है। इसकी पुष्टि के बाद ही पंजीकरण प्रक्रिया आगे बढ़ती है 
अगले चरण में पिकअप पंजीकरण कराने वाले को पेटीएम वॉलेट से कनेक्ट कर देता है
वेरीफिकेशन प्रक्रिया पूरी होने पर पिकअप एडमिक मिले प्रोफाइल की जांच पड़ताल करता है इसके बाद ही उसे ऑनलाइन किया जाता है।
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चंद्रसेन विक्रम - फोटो : अमर उजाला
सिर्फ कमाई नहीं सामाजिक सरोकार भी...
दिल्ली-एनसीआर में लोगों के समक्ष परिवहन सबसे बड़ी समस्या है। वाहनों का बोझ बढ़ता जा रहा है। ट्रैफिक जाम और प्रदूषण का भी संकट खड़ा हो गया है। अगर इसे कम करना है तो कुछ ऐसा करना होगा कि लोग एक दूसरे के साथ अपने कैब, कार और ऑटो को शेयर करने लगे। इससे सड़क पर वाहनों की कमी होगी। प्रदूषण में भी कमी आएगी और पैसे की बचत होगी।   स्टार्टअप शुरू करने वालों की प्रोफाइल...
 अमित भसीन
स्नातक आईआईटी रुड़की
एमबीए आईआईएम, अहमदाबाद
गूगल, पेटीएम और इंडक्टिस जैसी कंपनियों में कर चुके हैं काम

रामिल बंसल
स्नातक आईआईटी रुड़की
एमबीए आईआईएम लखनऊ
डिलोइट व आदित्य बिरला में कर चुके हैं नौकरी

चंद्रसेन विक्रम
स्नातक आईआईटी रुड़की
पोस्ट ग्रेजुएट इंपीरियल कॉलेज लंदन
नेस्ले व रैडियोलूकस में काम कर चुके हैं

अभिषेक जैन
स्नातक आईआईटी रुड़की
मास्टर डिग्री कैब्रिज
नेस्ले और सीईईडब्ल्यूए में कर चुके हैं काम   अशीष गुप्ता
स्नातक आईआईटी रुड़की
जेपी मोर्गन में कर चुके हैं काम  
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