ग्राम प्रधान सतनाम सिंह के चेहरे पर जो मुस्कान दिखती है उससे जटिलता का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।
10वीं की परीक्षाओं के दौरान 1981 में पिता ने दुनिया छोड़ी तो पढ़ने की तमन्ना भी खत्म हो गयी। मन में रुतबा जागा कि परिवार को दुख के संकट से उबारना है। खेती में जुटे और घर की स्थिति सुधरने लगी। 1996 में माता की जिद पर बन्नाखेड़ा के इट्व्वा गांव से विवाह हुआ। विवाह के दो साल बाद 1998 में मां ने भी दुनिया छोड़ दी।
कहते हैं भगवान हिम्मत वालों की ही परीक्षा लेता है। 2009 में शादीशुदा भाई गुरनाम सिंह तथा 2014 में भाई महेंद्र सिंह की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी बढ़ गयी। ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ा तो सतनाम सिंह जीते। तभी से गांव की तमाम समस्याओं के लिये संघर्ष शुरू कर दिया।
गांव में मनरेगा के तहत 10 लाख रुपये से मंजाड़ी नाले से महेंद्र सिंह, संतोष के घर तक सीसी मार्ग बनाने के अलावा भू कटाव रोकने के लिये जाल बनवाये। चरन सिंह के खेत में मनरेगा के तहत 94 लाख रुपये की लागत से मत्स्य पालन पौंड का निर्माण किया। जिससे गांव के सैकड़ों लोग लाभान्वित हो रहे हैं।
ग्राम बेरिया में पानी की समस्या को देखते हुए निकासी नाली का निर्माण करवाया। जिसमें 50 हजार रुपये मनरेगा व बांकी अपनी जेब से लगवाया। इसी गांव के 15 जनजाति बुक्सा जनजाति के लोगों के बकरी बाड़े बनवाये। साथ ही 15 लोगों को इंद्रा आवास दिये गये। इन सभी विकास कार्यों के आधार पर उन्हें जमशेदपुर झारखंड में पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
ग्राम प्रधान सतनाम सिंह ने बताया वर्ष 2014-15 में किये गये विकास कार्यों की सूची उन्होंने ब्लाक द्वारा पंचायती राज अधिकारी को भेजी थी। 24 अप्रैल को पंचायती राज दिवस पर केंद्रीय पंचायती राज एवं ग्राम विकास मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह ने उन्हें पुरस्कृत किया। जिससे गांव की सूरत और उनकी मूरत बदली है।
उन्होंने पुरस्कार मिलने के लिये ब्लाक प्रमुख संजय नेगी, खंड विकास अधिकारी मनोहर चंद्र जोशी, ग्राम विकास अधिकारी गिरीश चंद्र तिवारी, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी ओमवीर सिंह, दिनेश सैनी को प्रेरणा श्रोत बताया।