कलियां मुरझा गईं तो चमन रूठ जाएगा, श्रापित होगा वह देश जहां बेटियों का साथ छूट जाएगा। 11वीं कक्षा की छात्रा अंशिका जैन ऐसी ही सामाजिक कुरीतियों पर तंज कसने वाली कविताओं से समाज को सुधारने का बीड़ा उठाए हुए है। इस कारण उन्होंने बेहद कम उम्र में तीलू रौतेली जैसा पुरस्कार प्राप्त करने में सफलता पाई है।
सुभाष नगर निवासी अनुज कुमार जैन के यहां जन्मी अंशिका जैन कक्षा चार से ही कहानियां लिखने लगीं। कक्षा छठी में आते ही जब उनका संपर्क साहित्य दर्पण संस्था से हुआ तो कुछ कवियों के कहने पर उन्होंने कविताएं लिखनी शुरू कीं। कविताएं लिखने और कार्यक्रमों में कविताएं सुनाने का सिलसिला ऐसा शुरू हुआ कि 21 दिसंबर 2014 को उनका अंशिका नाम से कविता संग्रह तक छप गया।
इसमें उन्होंने करीब 130 से अधिक कविताएं लिखी हैं। उन्होंने भटकता बचपन, पहाड़ों की बर्बादी जैसे विषयों पर कविताएं लिखकर सामाजिक बुराइयों पर प्रहार करने की कोशिश की। हाल में ही अंशिका को तीलू रौतेली पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। उन्हें यह सम्मान आठ मार्च को महिला दिवस पर देहरादून में मुख्यमंत्री देंगे।
मारिया स्कूल में कक्षा 11 में पढ़ने वाली अंशिका का कहना है कि अभी तो और आगे जाना है। जब वह कहीं जाती हैं तो वहां का माहौल या परिस्थिति देखकर कविता लिखती हैं। कविता लिखने के लिए उन्हें ज्यादा समय नहीं लगता। उन्होंने बताया कि फ्रेंडशिप पर वह एक उपन्यास भी लिख रही हैं। उनका उद्देश्य है कि कविताओं के माध्यम से लोग जागरूक हों। उनका सपना प्रोफेसर बनकर बच्चों को अच्छी शिक्षा देना है।
ममता को मिलेगा तीलू रौतेली पुरस्कार
द्वाराहाट ब्लॉक निवासी ताइक्वांडो खिलाड़ी ममता रावत का जिले से तीलू रौतेली पुरस्कार के लिए चयन हुआ है। बाल विकास परियोजना अधिकारी पीएस बृजवाल ने बताया कि ममता रावत ताइक्वांडो खिलाड़ी हैं। इस खेल में विशिष्ट उपलब्धि के लिए उनका चयन तीलू रौतेली पुरस्कार के लिए किया गया है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर देहरादून में मुख्यमंत्री हरीश रावत उन्हें यह पुरस्कार देंगे।