ड्राइविंग स्टाइल प्रमुख कारण
कहते हैं कि ड्राइविंग की स्टाइल टायर की उम्र तय करने के लिए काफी है। अगर चालक बार-बार तेज एक्सेलरेशन लेता है, तो अचानक हार्ड ब्रेक लगता है या फिर तेज रफ्तार में शार्प टर्न लेता है, तो टायर पर अतिरिक्त घर्षण और दबाव पड़ता है। इससे रबर तेजी से घिसता है चाहे वाहन इलेक्ट्रिक हो या पेट्रोल। इसके उलट, अगर गाड़ी स्मूद तरीके से चलाई जाए, धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई जाए और ब्रेकिंग नियंत्रित हो, तो टायर की लाइफ औसतन 10–15 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है।
बचाव का सबसे आसान तरीका
ऑटो एक्सपर्ट्स के अनुसार मेंटेनेंस भी उतना ही जरूरी है। टायर में सही एयर प्रेशर बनाए रखना बुनियादी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि कम या ज्यादा प्रेशर से टायर असमान रूप से घिस सकते हैं या तो किनारों से या बीच के हिस्से से। हर 5,000 से 7,000 किलोमीटर पर टायर रोटेशन कराने से सभी टायर समान रूप से घिसते हैं और उनकी उम्र संतुलित रहती है। साथ ही, समय-समय पर व्हील अलाइनमेंट और बैलेंसिंग की जांच करवाने से गाड़ी सीधी चलती है और अनावश्यक कंपन या घिसावट से बचाव होता है। वाहन को ओवरलोड करने से भी टायर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, इसलिए निर्धारित भार सीमा का पालन जरूर करें।
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क्या पेट्रोल कार के टायर EV में लगा सकते हैं?
अक्सर लोगों के मन में ये भी सवाल रहता है कि क्या पेट्रोल कार के टायर को हम ईवी में लगा सकते हैं। तकनीकी रूप ये बात करें तो नहीं, ये आदर्श नहीं है। क्योंकि ईवी के टायर ज्यादा वजन सहने के हिसाब से डिजाइन किए जाते है। साथ ही ये (ईवी) बेहतर ग्रिप और लो रोलिंग रेजिस्टेंस देते हैं। साइलेंट ऑपरेशन के लिए अलग रबर कंपाउंड इस्तेमाल करते हैं। इसलिए साधारण यानी की पेट्रोल कार के टायर लगाने से रेंज घट सकती है, हैंडलिंग प्रभावित हो सकती है और टॉर्क का पूरा फायदा भी नहीं मिल पाता। इसलिए ऐसा करना आपकी कार को मुश्किल में डाल सकता है।
टायर की उम्र कैसे बढ़ाएं?
अगर आप नहीं चाहते कि हर दो साल में नए टायर लगवाने पड़ें, तो ये टिप्स अपनाएं:
- ईवी टायर्स ही चुनें: कभी भी अपनी इलेक्ट्रिक कार में साधारण पेट्रोल गाड़ी वाले टायर न डलवाएं। वे भारी वजन और टॉर्क नहीं झेल पाएंगे और बहुत जल्दी जवाब दे देंगे।
- स्मूद ड्राइविंग: अचानक तेज या रफ्तार में गाड़ी न भगाएं। धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाना आपके टायर और बैटरी रेंज दोनों के लिए बेहतर है।
- रीजेनरेटिव ब्रेकिंग का सही उपयोग: ईवी में ब्रेक कम घिसते हैं क्योंकि मोटर खुद गाड़ी रोकती है, लेकिन टायर पर दबाव फिर भी पड़ता है। स्मूद स्टॉपिंग की आदत डालें।
- अलाइनमेंट और रोटेशन: हर 5,000 से 7,000 किलोमीटर पर टायरों को रोटेट करवाएं, जिससे वे चारों तरफ से बराबर घिसें।