अगर कार में आगे की तरफ इंजन लगाया गया है तो कार का वजन पूरी तरह से आगे की ओर रहता है। ऐसे में कई बार कार को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। मगर इंजन के आगे होने से फायदा ये हैं कि कार की कूलिंग काफी बेहतर ढंग से होती है। इसके साथ ही इंजन के आगे होने से बूट स्पेस भी ज्यादा मिलता है।
कार के बीच में लगा हुआ इंजन अक्सर छोटी कारों में होता है, जिनमें दो लोग ही बैठ सकते हैं। इन कारों में इंजन ड्राइवर सीट के पीछे होता है। इन कारों में बीच में इंजन इसलिए लगाया जाता है कि ताकि कार का संतुलन बराबर रहे। कार के पहियों पर बराबर वजन रहे। मगर ड्राइवर के पीछे सीट न होने के कारण कोई तीसरा व्यक्ति नहीं बैठ सकता है।
कार में अगर पीछे की ओर इंजन लगा है तो ऐसी कारों को शुरू करना काफी आसान रहता है। इस तरह की कारों में कार का वजन पीछे की तरफ होता है तो कार को संतुलित करना अधिक आसान हो जाता है। ऐसी स्थिति में कार अच्छे ढंग से सड़क के साथ घर्षण कर पाती है। हालांकि, इस तरह की कारों का निर्माण देश में नहीं होता है, क्योंकि इनकी लागत काफी ज्यादा होती है।