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ऑटोमोबाइल कंपनियों के पास ऐसा क्या है खास, सरकार ने क्यों बोला बनाओ वेंटिलेटर!

Tue, 31 Mar 2020 06:55 PM IST
अवधेश कुमार ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Mahindra Develops Prototype Of A Ventilator - फोटो : Social Media
कोरोना वायरस अब तक दुनिया के 190 से अधिक देशों में फैल गया है। वहीं दिन पर दिन इससे संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस बीमारी से निजात पाने के लिए वैज्ञानिक और कई शोधकर्ता भरसक कोशिश कर रहे हैं। कोरोना को लेकर लोगों में इतना खौफ है कि बाजार में फेसमास्क और वेंटिलेटर्स की खासी कमी महसूस की जा रही है। लचर स्वास्थ्य सेवाओं से परेशान देश में पहले से ही वेंटिलेटर्स का आकाल है, वहीं कोरोना ने इसे और बढ़ा दिया है। मजबूरन सरकार को ऑटोमोबाइल कंपनियों को वेंटिलेटर बनाने का ऑर्डर करना पड़ा है। हालांकि ऐसा करने वाला अकेला भारत नहीं हैं, बल्कि इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिका की जनरल मोटर्स और फोर्ड से वेंटिलेटर बनाने के लिए कह चुके हैं। सवाल यह है कि आखिर सरकारें ऑटोमोबाइल कंपनियों से क्यों जीवनरक्षक उपकरण बनाने के लिए कह रही हैं। जानते हैं क्या है वजह...
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Coronavirus Ventilator - फोटो : Social Media

वेंटिलेटर्स की कमी

एक रिपोर्ट्स के मुताबिक इटली के कुछ अस्पतालों ने तो बुजुर्ग मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना ही बंद कर दिया है। यह अस्पताल सिर्फ युवाओं को ही भर्ती कर रहे हैं। इसकी वजह सिर्फ वेंटिलेटर है। अस्पताल वेंटिलेटर्स की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में यह स्थिति और भी ज्यादा चिंताजनक हो जाती है। हालांकि ऐसा लग रहा है कि इस बीमारी से निजात पाने के लिए अभी काफी समय लग सकता है। कई डॉक्टरों का कहना है कि यह एक गंभीर बीमारी है और एक बड़ी समस्या की ओर इशारा करती है। हालांकि लोग अस्पतालों का तनाव कम कर सकें, इसके लिए वह खासा ध्यान भी रख रहे हैं। कई देश सोशल डिस्टेंस और लॉकडाउन का सहारा ले रहे है। इसके बावजूद भी लगातार इन मरीजों की संख्या बढ़ रही है। दुनिया में अब तक 6.6 लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। 
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बीईएल - फोटो : social media

ये है प्रमुख वजह

ऑटोमोबाइल कंपनियों को वेंटिटर के ऑर्डर देने के पीछे कुछ खास वजह हैं। असल में ऑटोमोबाइल्स कंपनियों के पास उत्पादन बढ़ाने के लिए इंजीनियरिंग विशेषज्ञता है। इन कंपनियों के पास बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर होता है। रिसर्च एंड डेवलपमेंट का अलग भारीभरकम विभाग होता है। फोर्ड मोटर्स, मारुति सुजुकी आदि कंपनियां हर साल लाखों वाहनों का निर्माण करती हैं। इसलिए उनके पास विशाल टीमें होती हैं। साथ ही जगह की भी कमी नहीं होती है। उनके पास अनुभवी वर्कर होते हैं। इन कंपनियों के पास पैसे की भी कोई कमी नहीं होती है। इसलिए यह भारी निवेश कर सकती हैं। जबकि अन्य कंपनियाों के लिए ऐसा करना मुश्किल है। 

 

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वेंटिलेटर - फोटो : SELF

वेंडर्स का बड़ा नेटवर्क

यह कंपनियां आसानी से सरकार की मदद कर सकती हैं। यह अपने वर्करो से तुरंत माल तैयार कर सप्लाई कर सकती हैं। इसके अलावा इन कंपनियों के पास कंपोनेंट्स बनाने के लिए वेंडर्स का विशाल नेटवर्क होता है। ये लोग लाइट से लेकर इंजन का सामान बनाते हैं और इंजीनियरिंग में इनकी दक्षता होती है। इसलिए इन्हें वेटिंलेटर जैसे उपकरणों में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल भी आसानी से उपलब्ध होता है।  

यही वजह है कि सरकारें ऑटोमोबाइल्स कंपनियों से संपर्क बना रही हैं।  बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सबसे पहले इन्हीं कंपनियों से वेंटिलेटर बनाने को कहा है। अमेरिका में फोर्ड, टेस्ला और जनरल मोटर्स जैसी कंपनियां वेंटिलेटर के निर्माण में मदद कर रही हैं। वहीं भारत में भी महिंद्रा ने पहले ही मास्क और वेंटिलेटर बनाने का काम शुरू कर दिया है। यह कंपनी बड़े पैमाने पर वेंटिलेटर और मास्क बना रही हैं।

 
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demo pic - फोटो : अमर उजाला

मारुति बनाएगी 10 हजार वेंटिलेटर

दूसरी ओर मारुति सुजुकी ने भी एग्वा कंपनी के साथ समझौता किया है और तेजी से वेंटिलेटर बनाने का काम कर रही हैं। कंपनी हर महीने 10 हजार वेंटिलेटर बनाने की योजना बना रही है। किआ और बीवाईडी जैसी कंपनियां भी मास्क बनाने का काम कर रही हैं। इसके अलाला कई अन्य  कंपनियों ने भी इस आपदा को देखते हुए सरकार के साथ मिलकर काम करने का फैसला किया है। ताकि जल्द से जल्द कोरोना वायरस जैसी गंभीर बीमारी से निपटा जा सके।  
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