देश के कई राज्यों में प्रदूषण की स्थिति काफी खतरनाक स्तर पर है। ऐसे में सरकार की ओर से वाहनों पर कई नियमों को लागू किया जा रहा है। वहीं बीएस3, बीएस4 और बीएस6 वाहन का कैसे पता लगाएं। आइए जानते हैं।
दिल्ली एनसीआर सहित कई क्षेत्रों में प्रदूषण के कारण सांस लेना काफी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में कुछ वाहनों पर रोक भी लगाई जा रही है। हम इस खबर में आपको बता रहे हैं कि बीएस3, बीएस4 और बीएस6 वाहनों की जानकारी किस तरह से ली जा सकती है।
विज्ञापन
क्या है बीएस मानक
बीएस का मतलब भारत स्टेज है। इसका उपयोग वाहनों में प्रदूषण नापने के लिए किया जाता है। देश में चलने वाले हर वाहन के लिए बीएस मानक जरूरी है। बीएस के साथ जो नंबर होता है, उसके जरिए ये पता लगाया जाता है कि वाहन कितना प्रदूषण करता है।
क्या है बीएस3
देश में प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार की ओर से कई तरह के नियम लाए गए हैं। वाहनों में इसकी शुरुआत साल 2000 से हुई थी। तब बने हुए वाहनों को बीएस2 कैटेगरी में रखा गया था। वहीं साल 2000 से पहले के वाहनों को बीएस1 कैटेगरी में और साल 2010 और उसके बाद बने वाहनों को बीएस3 कैटेगरी में रखा गया है।
बीएस4 में आते हैं ये वाहन
बीएस3 के बाद सरकार की ओर से कई नियमों को और बेहतर किया गया, जिससे वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी लाई जा सके। इसके लिए कंपनियों की ओर से कई अपडेट किए गए। एक अप्रैल 2017 से देशभर में बीएस4 चरण को लागू किया गया था। ऐसे में एक अप्रैल 2017 और उसके बाद बने वाहनों को बीएस4 कैटेगरी में रखा गया है।
बीएस6 में हैं ये वाहन
देशभर में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को और कम करने के लिए सरकार की ओर से बीएस6 चरण को लागू किया गया है। फिलहाल देशभर में बीएस6 चरण वाले वाहनों की ही बिक्री की जा रही है। बीएस6 के पहले चरण को देशभर में एक अप्रैल 2020 से लागू किया गया था और एक अप्रैल 2023 से बीएस6 के दूसरे चरण को लागू किया गया है।