आग लगने की घटनाओं में हुई बढ़ोतरी के सरकारी आंकड़े बेहद डरावने है। दिल्ली फायर सर्विस की सांख्यिकीय रिपोर्ट के अनुसार 2023-24 में वाहन में आग लगने से घायल होने वालों की संख्या बढ़कर 3232 हो गई, जबकि 1303 लोगों ने अपनी जान गंवाई। यह आंकड़ा 2022-23 की 1029 मौतों से लगभग 27 प्रतिशत अधिक है। यह समस्या सिर्फ राजधानी नई दिल्ली तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ समय में देश के अलग-अलग हिस्सों में वाहन में आग लगने की खबरें आई हैं।
| वर्ष |
आग के मामलें |
घायल |
मृत्यु |
| 2020-21 |
25709 |
1135 |
346 |
| 2021-22 |
27343 |
1421 |
591 |
| 2022-23 |
31958 |
2193 |
1029 |
| 2023-24 |
31575 |
3232 |
1303 |
अक्तूबर 2025 से अब तक आंध्र प्रदेश के सलूर, उत्तराखंड के रुड़की, हरिद्वार, मध्य प्रदेश के छतरपुर, राजस्थान के जोधपुर, गुरुग्राम, गुजरात और यूपी के नोएडा से चलती गाड़ियों में आग लगने की खबरें सामने आई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार वाहनों में आग लगने के मुख्य कारण तकनीकी लापरवाही और खराब रखरखाव से जुड़े हैं।
इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट- तारों का इंसुलेशन घिस जाने, गलत फ्यूज या आफ्टरमार्केट एक्सेसरीज (जैसे हाई-पावर हेडलाइट या म्यूज़िक सिस्टम) के लिए घटिया वायरिंग का उपयोग करने से स्पार्क उत्पन्न होता है, जो आग पकड़ लेता है।
फ्यूल/ऑयल लीक- पेट्रोल, डीजल या इंजन ऑयल का पाइप, इंजेक्शन सिस्टम या टैंक से रिसाव होना। गर्म इंजन की सतह या शॉर्ट सर्किट स्पार्क के संपर्क में आते ही ये लीकेज तुरंत आग पकड़ लेती हैं।
ओवरहीटिंग- लंबी यात्रा के दौरान बिना रुके गाड़ी चलाने या कूलेंट की कमी के कारण इंजन का अत्यधिक गर्म होना। पिघले हुए प्लास्टिक पार्ट या लीक हुए तेल का संपर्क आग का कारण बनता है।
खराब मेंटेनेंस- पुरानी गाड़ियों में घिसी हुई ऑयल सील, फ्यूल पाइप या ढीली वायरिंग को समय पर न बदलना।
इंजन ऑयल/ग्रीस रिसाव- गर्म टर्बो या सिलिंडर हेड के पास जमा हुआ लीक हुआ तेल या ग्रीस का तुरंत जल उठना।
टायर फेलियर/ब्रेक जाम- कुछ मामलों में जाम हुए ब्रेक के कारण टायर और एक्सेल पर अत्यधिक घर्षण (Friction) और गर्मी पैदा होती है, जो पास के फ्यूल टैंक या वायरिंग में आग लगा सकती है।
बाहरी ज्वलनशील पदार्थ- खिड़की से चलती सिगरेट, पटाखा या माचिस की तीली फेंकने पर ईंधन वाष्प (Fuel Vapours) के संपर्क में आने से तुरंत आग लग सकती है।
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