भारत में पिछले 42 महीनों में 30 प्रतिशत से अधिक चलते वाहनों में आग लगने की घटनाएं सामने आई है, जिसमें अधिकतर वजह शॉर्ट सर्किट की बताई जाती है।
दिल्ली-एनसीआर व अन्य राज्यों (उत्तराखंड, मप्र, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात) में चलते वाहनों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही है। दिल्ली फायर सर्विस के अनुसार 2023-ंं24 में आग लगने से 1303 लोगों की मौत हुई, जबकि पिछले वर्ष (2022-23) यह आंकड़ा 1029 था।
आग लगने की मुख्य वजह ईंधन रिसाव, इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट, ओवरहीटिंग व गैर-मानक आफ्टरमार्केट फिटिंग्स (यह ऐसे पुर्जे किसी तीसरे पक्ष के निर्माता से प्राप्त होते हैं, जिसने आपके वाहन के मूल पुर्जे नहीं बनाए हो। ये आमतौर पर कई मॉडलों में इस्तेमाल के लिए बनाए गए सामान्य पुर्जे होते हैं, इसलिए हो सकता है कि ये आपकी कार के अनुकूल न हों। ) शामिल हैं। इन दुर्घटनाओं से बचने के लिए नियमित मेंटनेंस व फायर एक्सटिंग्विशर रखना बहुत जरुरी हे।
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देश की सड़कों पर दोपहिया से लेकर चार पहिया वाहनों तक में आग लगने की घटनाएं एक भयानक त्रासदी का रूप ले रही हैं। चंद पलों में ही गाड़ियां आग के गोले में तब्दील हो रही हैं और इन दुर्घटनाओं में मरने वाले मासूमों का आंकड़ा चिंताजनक रूप से बढ़ रहा है।
आग लगने की घटनाओं में हुई बढ़ोतरी के सरकारी आंकड़े बेहद डरावने है। दिल्ली फायर सर्विस की सांख्यिकीय रिपोर्ट के अनुसार 2023-24 में वाहन में आग लगने से घायल होने वालों की संख्या बढ़कर 3232 हो गई, जबकि 1303 लोगों ने अपनी जान गंवाई। यह आंकड़ा 2022-23 की 1029 मौतों से लगभग 27 प्रतिशत अधिक है। यह समस्या सिर्फ राजधानी नई दिल्ली तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ समय में देश के अलग-अलग हिस्सों में वाहन में आग लगने की खबरें आई हैं।
| वर्ष | आग के मामलें | घायल | मृत्यु |
| 2020-21 | 25709 | 1135 | 346 |
| 2021-22 | 27343 | 1421 | 591 |
| 2022-23 | 31958 | 2193 | 1029 |
| 2023-24 | 31575 | 3232 | 1303 |
अक्तूबर 2025 से अब तक आंध्र प्रदेश के सलूर, उत्तराखंड के रुड़की, हरिद्वार, मध्य प्रदेश के छतरपुर, राजस्थान के जोधपुर, गुरुग्राम, गुजरात और यूपी के नोएडा से चलती गाड़ियों में आग लगने की खबरें सामने आई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार वाहनों में आग लगने के मुख्य कारण तकनीकी लापरवाही और खराब रखरखाव से जुड़े हैं।
इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट- तारों का इंसुलेशन घिस जाने, गलत फ्यूज या आफ्टरमार्केट एक्सेसरीज (जैसे हाई-पावर हेडलाइट या म्यूज़िक सिस्टम) के लिए घटिया वायरिंग का उपयोग करने से स्पार्क उत्पन्न होता है, जो आग पकड़ लेता है।
फ्यूल/ऑयल लीक- पेट्रोल, डीजल या इंजन ऑयल का पाइप, इंजेक्शन सिस्टम या टैंक से रिसाव होना। गर्म इंजन की सतह या शॉर्ट सर्किट स्पार्क के संपर्क में आते ही ये लीकेज तुरंत आग पकड़ लेती हैं।
ओवरहीटिंग- लंबी यात्रा के दौरान बिना रुके गाड़ी चलाने या कूलेंट की कमी के कारण इंजन का अत्यधिक गर्म होना। पिघले हुए प्लास्टिक पार्ट या लीक हुए तेल का संपर्क आग का कारण बनता है।
खराब मेंटेनेंस- पुरानी गाड़ियों में घिसी हुई ऑयल सील, फ्यूल पाइप या ढीली वायरिंग को समय पर न बदलना।
इंजन ऑयल/ग्रीस रिसाव- गर्म टर्बो या सिलिंडर हेड के पास जमा हुआ लीक हुआ तेल या ग्रीस का तुरंत जल उठना।
टायर फेलियर/ब्रेक जाम- कुछ मामलों में जाम हुए ब्रेक के कारण टायर और एक्सेल पर अत्यधिक घर्षण (Friction) और गर्मी पैदा होती है, जो पास के फ्यूल टैंक या वायरिंग में आग लगा सकती है।
बाहरी ज्वलनशील पदार्थ- खिड़की से चलती सिगरेट, पटाखा या माचिस की तीली फेंकने पर ईंधन वाष्प (Fuel Vapours) के संपर्क में आने से तुरंत आग लग सकती है।
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