रुद्रपुर के डिप्टी कमिश्नर द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि बजाज ऑटो एक ऑटोमोबाइल निर्माता है, इसलिए उसके द्वारा सप्लाई किए गए स्पेयर पार्ट्स को 'ऑटो पार्ट्स' की श्रेणी में टैक्स किया जाना चाहिए। अधिकारियों का कहना है कि ये पार्ट्स वाहन निर्माण में ही उपयोग होते हैं और इन्हें विशेष रूप से कस्टमाइज किया गया है, इसलिए इन पर अलग टैक्स लागू होता है।
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बजाज ऑटो का विरोध
बजाज ऑटो ने टैक्स डिमांड को पूरी तरह खारिज कर दिया है। कंपनी का कहना है कि वह पिछले 30 से अधिक वर्षों से अपने स्पेयर पार्ट्स का वर्गीकरण सही तरीके से कर रही है। कंपनी का तर्क है कि उसका वर्गीकरण 'जनरल रूल्स ऑफ इंटरप्रिटेशन' और संबंधित सेक्शन व चैप्टर नोट्स पर आधारित है। इसके अलावा, एचएसएन एक्सप्लानटरी नोट्स और पूर्व न्यायिक निर्णय भी इसी वर्गीकरण का समर्थन करते हैं। कंपनी के अनुसार, टैक्स डिमांड और पेनल्टी कानूनन वैध नहीं है।
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