फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Fossil Fuels: गडकरी ने कहा- जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के तरीकों पर शोध कार्य की है जरूरत

Thu, 22 Feb 2024 10:50 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने के तरीकों पर शोध कार्य करने की जरूरत है। क्योंकि इससे पारिस्थितिक और पर्यावरणीय मुद्दों को कम करने में भी मदद मिलेगी।
विज्ञापन
Nitin Gadkari - फोटो : Social Media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने के तरीकों पर शोध कार्य करने की जरूरत है। क्योंकि इससे पारिस्थितिक और पर्यावरणीय मुद्दों को कम करने में भी मदद मिलेगी।
विज्ञापन


सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने बुधवार को एक कार्यक्रम में कहा कि शोध कार्यों में सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए स्थायी जीवन बनाने की भी बड़ी क्षमता है।

गडकरी ने 14वें संस्करण के एजिस ग्राहम बेल अवार्ड्स को संबोधित करते हुए कहा, "हमें जिस शोध की जरूरत है वह हमारे आयात (ईंधन का) कम करना है, ऐसा शोध जो लोगों को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा बना रहा है। और वह शोध जहां हम पारिस्थितिकी और पर्यावरण की समस्याओं को कम करने के लिए कचरे का उपयोग कर सकते हैं।" 
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि विभिन्न तकनीकों का उपयोग करके एक दिन भारत एक मजबूत स्थिति में होगा और 5 सालों में ऐसा समय आएगा जब देश जैव-विमानन ईंधन का निर्यातक होगा।

मंत्री ने कहा कि बांस, गेहूं के भूसे और धान के भूसे से बायोमास का उपयोग करके इथेनॉल बनाया जा सकता है और इथेनॉल से जैव-विमानन ईंधन बनाया जा सकता है।

उनके अनुसार, शोध कार्य स्मार्ट गांवों के विकास, जल संरक्षण और कृषि प्रथाओं के विविधीकरण में भी मदद करेगा।

गडकरी ने कहा, "मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप अपने शोध को कृषि, ग्रामीण, आदिवासी के लिए प्राथमिकता दें।... एक बड़ी क्षमता है जिसके द्वारा हम उन लोगों के लिए स्थायी जीवन बना सकते हैं जो सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक रूप से पिछड़े हैं।"

उन्होंने कार्बन डाइऑक्साइड से इथेनॉल बनाने के लिए चल रहे शोध कार्य का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा, "मैं बहुत सारे प्रयोग कर रहा हूं। वर्तमान में, हमारे पास 15,000 लीटर प्रति दिन का एक प्लांट है जहां प्रयोग चल रहा है... तमिलनाडु के वैज्ञानिक कार्बन डाइऑक्साइड से इथेनॉल बना रहे हैं। इसलिए, जो कुछ भी बड़ा शोध होने जा रहा है जो कार्बन डाइऑक्साइड से संबंधित है, यह इस देश के लोगों के लिए एक बहुत बड़ा योगदान और राहत होगी।"
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें