गौरतलब है कि FAME-II मार्च में खत्म हो गया था। और संबंधित मंत्रालय ने सिस्टम को संतुलित करने और ईवी सेगमेंट को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रमोशन स्कीम (EMPS) शुरू की है। इसे FAME-III के लागू होने तक के लिए पेश किया गया था।
EMPS जुलाई में खत्म होने वाला था, लेकिन केंद्र सरकार ने तारीखों को आगे बढ़ाने का फैसला किया। यह 778 करोड़ रुपये के बढ़े हुए परिव्यय के साथ सितंबर के आखिर तक लागू रहेगा।
15 अगस्त तक, EMPS ने अपने संशोधित लक्ष्य का 60 प्रतिशत हासिल कर लिया है। जिसके तबत 5,60,000 यूनिट्स के लक्ष्य में से 3,34,260 इलेक्ट्रिक वाहनों को सपोर्ट किया गा है।
भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) एक योजना का मसौदा भी तैयार कर रहा है। जिसके तहत सब्सिडी योजना के तहत बेचे जाने वाले किसी भी इलेक्ट्रिक वाहन (EV) पर मंत्रालय का लोगो होगा।
साथ ही ग्राहकों को योजना के बारे में सूचित करने वाला एक प्रमाण पत्र भी होगा। इसके अलावा, सरकार सेल्फ-केवाईसी प्रक्रिया को अनिवार्य कर सकती है। जिसके तहत ग्राहकों को अपने वाहनों को पंजीकृत करने के लिए एक सरकारी पोर्टल पर एक सेल्फी अपलोड करने और अपने आधार डिटेल्स को प्रमाणित करने की जरूरत होगी।