फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

EV PLI: केंद्रीय बजट में ईवी पीएलआई को फिर से शामिल किया जा सकता है, R&D और मैन्युफैक्चरिंग को भी बढ़ावा!

Sat, 17 Jan 2026 06:02 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय बजट देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) को अपनाने में तेजी लाने के लिए फाइनेंशियल और पॉलिसी इंसेंटिव को बढ़ाकर और बेहतर कर सकता है।
विज्ञापन
Electric Car - फोटो : Freepik
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आगामी यूनियन बजट 2026-27 में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) अपनाने की रफ्तार तेज करने के लिए सरकार वित्तीय और नीतिगत प्रोत्साहनों को आगे बढ़ा सकती है। डेलॉइट इंडिया की पार्टनर शीना सरीन के अनुसार, सरकार स्वच्छ मोबिलिटी को बढ़ावा देने, घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने और ईवी वैल्यू चेन में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए अहम घोषणाएं कर सकती है।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें - Split Rear Seats SUV: ये हैं वो पांच एसयूवी जिनमें मिलती हैं स्प्लिट रियर सीट्स, कीमत 15 लाख रुपये से कम

EV के लिए PLI स्कीम में क्या बदलाव संभव हैं?
डेलॉइट इंडिया का आकलन है कि ईवी और एडवांस्ड ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स के लिए प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम का री-कैलिब्रेशन किया जा सकता है।
  • पात्रता शर्तों में ढील
  • निवेश की न्यूनतम सीमा में कमी
  • घरेलू वैल्यू एडिशन (डीवीए) मानकों में लचीलापन
इन बदलावों से EV स्टार्टअप्स और कंपोनेंट सप्लायर्स समेत ज़्यादा कंपनियां प्रोत्साहन के दायरे में आ सकेंगी।

यह भी पढ़ें - Toll Tax: एक अप्रैल से टोल प्लाजा पर नगद भुगतान बंद होने वाला है? जानें क्या है बड़ा अपडेट

R&D और कैपिटल गुड्स पर टैक्स राहत क्यों अहम है?
शीन सरीन के मुताबिक, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) ईवी इकोसिस्टम का केंद्रीय स्तंभ है।
  • R&D पर लक्षित टैक्स इंसेंटिव
  • बैटरियों, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के लोकलाइजेशन को तेज कर सकते हैं
इसके साथ ही प्रस्तावित कैपिटल गुड्स इंसेंटिव स्कीम से ऑटो और ईवी सेक्टर के लिए आवश्यक मशीनरी का घरेलू निर्माण बढ़ेगा, जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी।

आयात निर्भरता घटाने से क्या फायदा होगा?
डेलॉइट का कहना है कि ऐसे कदमों से:
  • आयातित तकनीकों पर निर्भरता कम होगी
  • कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के आयात में कमी आएगी
  • विदेशी मुद्रा की बचत होगी
लंबी अवधि में इससे पूरे EV वैल्यू चेन को मजबूती मिलेगी।

यह भी पढ़ें - Hybrid Car Mileage: हाइब्रिड कार से माइलेज कैसे बढ़ाएं? जानिए फ्यूल एफिशिएंसी निकालने के स्मार्ट तरीके

जीएसटी और इनडायरेक्ट टैक्स पर क्या उम्मीदें हैं?
इनडायरेक्ट टैक्स को लेकर आगे बड़े बदलाव की गुंजाइश सीमित बताई जा रही है।
  • हालिया जीएसटी 2.0 सुधार के तहत
  • छोटे वाहनों पर दरें -18 प्रतिशत
  • मिड और उच्च सेगमेंट पर - 40 प्रतिशत तय की जा चुकी हैं
हालांकि, उद्योग इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को लेकर चिंता जता रहा है, जिससे लागत बढ़ती है।

यह भी पढ़ें - Car Offers: MY2025 कारों पर भारी डिस्काउंट, हैचबैक से SUV और EV तक मिल रहे बड़े ऑफर, जानें डिटेल्स

इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर पर राहत कैसे मिल सकती है?
डेलॉइट के अनुसार,
  • कैपिटल गुड्स और इनपुट सर्विसेज पर इनवर्टेड ड्यूटी रिफंड
  • या निर्यात-लिंक्ड रिफंड
से लागत प्रतिस्पर्धात्मकता बेहतर हो सकती है। इससे ईवी की अफोर्डेबिलिटी सीधे तौर पर सुधरेगी।

यह भी पढ़ें - Car Modification: बंगलूरू में अवैध कार मॉडिफिकेशन पड़ा भारी, ₹70,000 की कार पर लगा ₹1.1 लाख का जुर्माना

कस्टम्स प्रक्रियाओं में सरलता क्यों जरूरी है?
ईवी निर्माताओं के लिए स्पेशल वैल्यूएशन ब्रांच (SVB) से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने की भी जरूरत बताई गई है।
  • प्रोविजनल ड्यूटी की अनिवार्यता हटाने
  • और SVB नियमों को सरल करने
से सप्लाई चेन में स्पष्टता आएगी और आयात लागत पर अनिश्चितता घटेगी।

यह भी पढ़ें - Fuel Efficiency Test: अब एसी ऑन कर होगा कारों का माइलेज टेस्ट, जानें सरकार ने क्यों लिया ये फैसला 

सस्टेनेबिलिटी के मोर्चे पर सरकार का रुख क्या है?
शीन सरीन का कहना है कि फिलहाल भारत में स्वच्छ मोबिलिटी की दिशा कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी मानकों से संचालित हो रही है, न कि सीधे कार्बन टैक्स या ग्रीन लेवी से। आगे चलकर ये मानक इलेक्ट्रिफिकेशन, हाइब्रिड और लो-एमिशन टेक्नोलॉजी को और प्रोत्साहित कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें - GRAP III: दिल्ली-NCR में ग्रेप चरण-3 किया गया लागू, जानें क्या पाबंदियां लगीं, ये वाहन नहीं चलेंगे
विज्ञापन

अंतिम निष्कर्ष
डेलॉइट इंडिया के मुताबिक, अगर आगामी बजट में ईवी-केंद्रित प्रोत्साहन, टैक्स राहत और स्पष्ट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क का संतुलित मिश्रण पेश किया जाता है, तो यह:
  • भारत के क्लीन एनर्जी लक्ष्यों को मजबूती देगा
  • फॉसिल फ्यूल निर्भरता घटाएगा
और देश की बाहरी आर्थिक स्थिति (एक्सटर्नल बैलेंस) को लंबी अवधि में बेहतर बनाएगा।

यह भी पढ़ें - Toll Tax: एनएच पर टोल नहीं चुकाया तो अटक जाएगा एनओसी, जानें क्यों लाया गया ये नया नियम? 

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें