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Car Cabin Air: कारों के केबिन की 99 प्रतिशत हवा में पाए गए कैंसर पैदा करने वाले रसायन, अध्ययन में खुलासा

Sat, 25 May 2024 09:19 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विज्ञान की पत्रिका "एनवायरमेंट साइंस एंड टेक्नोलजी" में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन, कारों के अंदर हवा की गुणवत्ता के बारे में चिंताजनक निष्कर्षों का खुलासा करता है। इस अध्ययन के मुताबिक, ड्राइवरों और यात्रियों को संभावित रूप से कैंसर पैदा करने वाले रसायनों के संपर्क में आने का जोखिम है। 
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Car Cabin - फोटो : Freepik
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विज्ञान की पत्रिका "एनवायरमेंट साइंस एंड टेक्नोलजी" में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन, कारों के अंदर हवा की गुणवत्ता के बारे में चिंताजनक निष्कर्षों का खुलासा करता है। इस अध्ययन के मुताबिक, ड्राइवरों और यात्रियों को संभावित रूप से कैंसर पैदा करने वाले रसायनों के संपर्क में आने का जोखिम है। अमेरिका में 30 राज्यों में किए गए इस अध्ययन में 2015 से 2022 के मॉडल वर्षों तक की 101 इलेक्ट्रिक, गैस और हाइब्रिड वाहनों से केबिन हवा की जांच की गई।
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चिंताजनक रूप से, परीक्षण की गई 99 प्रतिशत कारों में टीसीआईपीपी (TCIPP) के लिए सकारात्मक पाया गया। यह एक फ्लेम रिटार्डेंट (ज्वाला मंदक) है जिसकी संभावित कार्सिनोजेनिक क्षमताओं के लिए वर्तमान में अमेरिकी राष्ट्रीय विष विज्ञान कार्यक्रम (यूएस नेशनल टॉक्सिकोलॉजी प्रोग्राम) द्वारा जांच की जा रही है। इसके अलावा, ज्यादातर वाहनों में दो और फ्लेम रिटार्डेंट, टीडीसीआईपीपी (TDCIPP) और टीसीईपी (TCEP) भी पाए गए। ये दोनों भी कार्सिनोजेनिक होने के लिए जाने जाते हैं। कार्सिनोजेनिक यानी कैंसरजनक। कार्सिनोजेन ऐसे पदार्थ हैं जो आपके शरीर में कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं।

ड्यूक विश्वविद्यालय में प्रमुख शोधकर्ता और विष विज्ञान वैज्ञानिक रेबेका होन ने इन निष्कर्षों के महत्व पर जोर दिया, "यह देखते हुए कि औसत चालक हर दिन लगभग एक घंटा कार में बिताता है, यह एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है।" उन्होंने लंबे समय तक आने-जाने वाले लोगों और बाल यात्रियों के लिए चिंता को और उजागर किया, जो सांस लेने की उच्च दर के कारण विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं। अध्ययन से पता चला है कि गर्मी के महीनों के दौरान खतरनाक फ्लेम रिटार्डेंट का लेवल ऊंचा था। जिसका कारण कार की सामग्री से गर्मी के कारण रसायनों का ज्यादा निकलना बताया गया।

शोधकर्ताओं ने केबिन हवा में कैंसर पैदा करने वाले कंपाउंड के प्राथमिक स्रोत के रूप में सीट फोम की पहचान की। 1970 के दशक में राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात सुरक्षा प्रशासन (NHTSA) द्वारा स्थापित सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए जोड़े गए फ्लेम रिटार्डेंट, में प्रगति के बावजूद कोई बदलाव नहीं हुआ। जिससे पुराने नियमों के बारे में चिंता पैदा होती है।

अंतर्राष्ट्रीय अग्निशामक संघ के स्वास्थ्य, सुरक्षा और चिकित्सा निदेशक पैट्रिक मॉरिसन ने फ्लेम रिटार्डेंट की भूमिका को लेकर चिंता जताई। जो दमकलकर्मियों की उच्च कैंसर दर को बढ़ाती है। मॉरिसन ने एक प्रेस नोट में कहा, "इन हानिकारक रसायनों के साथ उत्पादों को भरना आग को रोकने के लिए बहुत कम काम करता है। और इसके बजाय पीड़ितों, और खासतौर पर पहले हस्तक्षेप करने वालों के लिए ज्यादा धुआं पैदा करता है और अधिक जहरीला बनाता है।" उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात सुरक्षा प्रशासन (NHTSA) से फ्लेम रिटार्डेंट रसायनों की जरूरत को खत्म करने के लिए ज्वलनशीलता मानक को संशोधित करने का आग्रह किया।

शोधकर्ताओं ने मॉरिसन की राय का समर्थन किया। और इस बात पर जोर दिया कि जहरीले फ्लेम रिटार्डेंट वाहनों में इस्तेमाल किए जाने पर कोई ठोस फायदा नहीं होता है।
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अध्ययन की लेखिका और ग्रीन साइंस पॉलिसी इंस्टीट्यूट की वरिष्ठ वैज्ञानिक लिडिया जाहल ने सुझाव दिया कि व्यक्ति जहरीले फ्लेम रिटार्डेंट के संपर्क को कम करने के लिए व्यावहारिक कदम उठा सकते हैं। जैसे कि कार की खिड़कियां खोलना और छायादार क्षेत्रों या गैरेज में पार्किंग करना। हालांकि, उन्होंने वाहनों में फ्लेम रिटार्डेंट के इस्तेमाल को पूरी तरह से कम करने की जरूरत पर जोर दिया। जाहल ने कहा, "काम पर आने-जाने से कैंसर का खतरा नहीं होना चाहिए। और बच्चों को स्कूल जाते समय ऐसे रसायनों के संपर्क में नहीं आना चाहिए जो उनके दिमाग को नुकसान पहुंचा सकते हैं।" उन्होंने इन रसायनों से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के लिए नियामक कार्रवाई की तत्काल जरूरत पर रोशनी डाली।
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