"भारत एक चुनौतीपूर्ण बाजार"
टेस्ला के सीएफओ वैभव तनेजा का कहना है कि भारत में आयातित गाड़ियों पर 70 प्रतिशत इम्पोर्ट ड्यूटी और 30 प्रतिशत लग्जरी टैक्स लगता है। इसका मतलब है कि एक टेस्ला कार की कीमत यहां अमेरिका की तुलना में लगभग दोगुनी हो जाती है। उन्होंने कहा, "इससे ग्राहकों में चिंता होती है क्योंकि उन्हें लगता है कि वे कार के लिए बहुत ज्यादा पैसे दे रहे हैं।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह अतिरिक्त पैसा टेस्ला को नहीं, बल्कि स्थानीय सरकार को जाता है।
टेस्ला के भारत में आने की समयसीमा को लेकर बहुत अटकलें लगाई जा रही हैं। तनेजा ने कोई खास तारीख तो नहीं बताई, लेकिन कहा कि "भारत एक बहुत ही मुश्किल बाजार है", आयात शुल्क के कारण। उन्होंने कहा, कंपनी इस बात को लेकर बहुत सतर्क है कि भारत में एंट्री का सही समय कब होगा।
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भारत में टेस्ला की रणनीति: क्या है अब तक की योजना?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय सरकार उन कंपनियों के लिए इम्पोर्ट ड्यूटी को 70 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत करने की योजना बना रही है, जो भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने का वादा करेंगी। शुरुआत में, टेस्ला अपनी गाड़ियां सीधे बर्लिन प्लांट से भारत में इम्पोर्ट करेगी।
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शोरूम और भर्ती: टेस्ला की तैयारियां
रिपोर्ट्स के मुताबिक, टेस्ला ने मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में एक शोरूम के लिए 5 साल की लीज साइन की है। दूसरा शोरूम दिल्ली के एरोसिटी में खोला जाएगा। इसके अलावा, टेस्ला ने अपनी आधिकारिक लिंक्डइन साइट पर भारत में कई नौकरियों के अवसर भी पोस्ट किए हैं। जिससे यह साफ है कि टेस्ला भारत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए गंभीर है।
हालांकि, कोई आधिकारिक समय-सीमा निर्धारित न होने के कारण, टेस्ला का भारतीय बाजार में एंट्री अनिश्चित बना हुआ है।
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