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TERI के नए अध्ययन में सीएनजी और ईवी को लेकर क्या बड़ा खुलासा हुआ है? भारतीय वाहनों के लिए किसे माना गया बेहतर?

Wed, 30 Sep 2026 09:28 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

'द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट' द्वारा किए गए इस अध्ययन को 30 सितंबर को दिल्ली के ताज महल होटल में 'पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड' के साथ मिलकर लॉन्च किया गया।
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CNG vs EV - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने की कोशिशों के बीच TERI के एक नए अध्ययन ने वाहनों के अलग-अलग ईंधन और पावरट्रेन के पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने रखे हैं। अध्ययन के मुताबिक, भारत के मौजूदा बिजली उत्पादन मिश्रण में CNG (सीएनजी) ज्यादातर वाहन श्रेणियों में EV (ईवी) की तुलना में कम समग्र लाइफसाइकल पर्यावरणीय प्रभाव दिखाती है।
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हालांकि, रिपोर्ट यह नहीं कहती कि ईवी हर मामले में कमजोर विकल्प हैं। इसके अनुसार, अलग-अलग वाहन श्रेणियों और उपयोग के आधार पर इलेक्ट्रिक, सीएनजी और अन्य ईंधनों के फायदे अलग-अलग हैं।

द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) द्वारा जारी "भारत के ऊर्जा बदलाव में वाहनों के ईंधन के तुलनात्मक मूल्यांकन पर अध्ययन" नामक एक विस्तृत रिपोर्ट में सामने आया है। जिसमें बताया गया है कि वर्तमान में भारत में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) का ओवरऑल लाइफसाइकल पर्यावरण प्रभाव (पर्यावरण पर बोझ) इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की तुलना में अधिकांश वाहन श्रेणियों में कम है। 
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यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भारत सरकार PM E-DRIVE (पीएम ई-ड्राइव) योजना जैसी पहलों के जरिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रही है। और पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 2,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। हालांकि, रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि केवल वाहन चलाते समय होने वाले टेलपाइप एमिशन के बजाय पूरे लाइफसाइकल एसेसमेंट के आधार पर पर्यावरण प्रभाव का सही आकलन किया जाना चाहिए। 

 

भारत के मौजूदा पावर मिक्स में ईवी का लाइफसाइकल प्रभाव अधिक क्यों है?

लाइफसाइकल असिसमेंट (LCA) में ईंधन या बिजली उत्पादन, वाहन निर्माण, संचालन और जीवनकाल समाप्त होने पर उसके निस्तारण (End-of-life Disposal) तक के सभी चरणों के प्रभाव का विश्लेषण किया जाता है:
  • कोयला आधारित बिजली उत्पादन: EV चलाते समय शून्य टेलपाइप उत्सर्जन करती हैं, लेकिन उनके लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली का बड़ा हिस्सा अभी भी भारत में मुख्य रूप से कोयले पर निर्भर है।
  • बैटरी मैन्युफैक्चरिंग का असर: इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी निर्माण प्रक्रिया और उसमें लगने वाले कच्चे माल का पर्यावरण पर काफी गहरा प्रभाव पड़ता है।
  • मूल्यांकन पैरामीटर्स: TERI ने जलवायु परिवर्तन, पार्टिकुलेट मैटर, जल खपत, मानव विषाक्तता, जीवाश्म संसाधनों और धातुओं/खनिजों की खपत जैसे कई महत्वपूर्ण पैरामीटर्स के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है।

 

किन वाहन श्रेणियों के लिए CNG और EV सबसे उपयुक्त हैं?

TERI के अध्ययन के अनुसार, कोई भी एक ईंधन या पावरट्रेन हर वाहन श्रेणी में सबसे बेहतर प्रदर्शन नहीं करता है, इसलिए श्रेणी-वार रणनीति की आवश्यकता है:
  • 2-व्हीलर और 3-व्हीलर: कम रनिंग कॉस्ट और उच्च उपयोग दर के कारण दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सबसे किफायती और पसंदीदा विकल्प के रूप में उभरती है।
  • पैसेंजर कार, टैक्सियां, बसें और LCVs: इन श्रेणियों के लिए सीएनजी वर्तमान में आर्थिक, पर्यावरणीय और परिचालन दृष्टिकोण से सबसे मजबूत संतुलन प्रदान करती है।
  • हैवी-ड्यूटी और लॉन्ग-हॉल ट्रांसपोर्ट: क्षेत्रीय फ्रेट मूवमेंट के लिए सीएनजी प्रासंगिक बनी रहेगी। जबकि लंबी दूरी के परिवहन के लिए LNG अधिक उपयोगी हो सकती है।

 

क्रूड ऑयल और क्रिटिकल मिनरल्स के मामले में भू-राजनीतिक चुनौतियां क्या हैं?

अध्ययन में भारत के ऊर्जा संक्रमण के एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू पर रोशनी डाली गई है:
  • आयात निर्भरता में बदलाव: इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने से देश की कच्चे तेल पर निर्भरता तो कम होती है। लेकिन इससे बैटरी निर्माण के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक सप्लाई चेन पर निर्भरता बढ़ जाती है।
  • कच्चा माल: लिथियम, कोबाल्ट, निकल और ग्रेफाइट जैसे खनिजों की सप्लाई चेन में लचीलापन और सुरक्षा भारत के ईवी इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी चुनौती है।

 

यह अध्ययन किस समय सीमा और ईंधनों के आधार पर तैयार किया गया है?

TERI का कहना है कि उन्होंने 6 वाहन श्रेणियों के तहत पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, बिजली और एलएनजी का तकनीकी, पर्यावरणीय, आर्थिक, सामाजिक और भू-राजनीतिक कारकों पर गहन विश्लेषण किया है। इसमें वर्तमान स्थिति के साथ-साथ वर्ष 2030, 2040 और 2050 तक के अनुमानों को शामिल किया गया है। जो भारत की स्वच्छ परिवहन नीति को दिशा देने में मदद करेंगे। 
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