नई सेस की आशंका भी
हालांकि राहत के साथ-साथ आशंका भी बनी हुई है। दरअसल, जीएसटी दरों पर चर्चा करने वाली मंत्री समूह की बैठक में कुछ राज्यों ने 40 प्रतिशत टैक्स के ऊपर अतिरिक्त सेस लगाने की मांग की है। अभी एसयूवी और लंबी सेडान (चार मीटर से ज्यादा और बड़ी इंजन क्षमता वाली गाड़ियां) पर 28 प्रतिशत जीएसटी और 22 प्रतिशत सेस वसूला जाता है।
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अगला फैसला जीएसटी काउंसिल लेगी
जीएसटी दरों पर आखिरी फैसला अगले महीने जीएसटी काउंसिल की बैठक में होगा, जिसकी अध्यक्षता वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी। केंद्र सरकार फिलहाल इस बात के पक्ष में है कि लग्जरी और "सिन गुड्स" पर सीधा 40 प्रतिशत टैक्स लगाया जाए और सेस खत्म कर दिया जाए।
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क्यों लगाया गया था सेस
दरअसल, जब जीएसटी लागू हुआ था तब राज्यों के "राजस्व नुकसान" की भरपाई के लिए सेस सिर्फ 5 साल के लिए लगाया गया था। लेकिन कोविड के दौरान हुई नुकसान की भरपाई के लिए इसे 3 साल और बढ़ा दिया गया।
छोटे वाहनों और टू-व्हीलर को भी राहत
सिर्फ बड़ी गाड़ियां ही नहीं, छोटे वाहनों और टू-व्हीलर पर भी टैक्स का बोझ घटकर 29 प्रतिशत से 18 प्रतिशत होने की संभावना है। हालांकि कीमतों में सबसे बड़ा फायदा एसयूवी और बड़ी कारों के खरीदारों को मिलेगा।
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ईवी पर असर
यह कटौती पेट्रोल-डीजल और हाइब्रिड गाड़ियों पर होगी, जिससे इनकी तुलना इलेक्ट्रिक गाड़ियों से और आसान हो जाएगी। अभी ईवी पर सिर्फ 5 प्रतिशत जीएसटी लगता है। पहले जहां ईवी और पेट्रोल-डीजल गाड़ियों के बीच 23 प्रतिशत का टैक्स अंतर था, वहीं अब यह घटकर 13 प्रतिशत रह जाएगा। जानकारों का मानना है कि इससे ईवी खरीदने का आकर्षण थोड़ा कम हो सकता है, खासकर टू-व्हीलर सेगमेंट में।
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क्या कंपनियां फायदा ग्राहकों तक पहुंचाएंगी
ग्राहकों और सरकार दोनों के बीच यह सवाल है कि क्या ऑटो कंपनियां यह टैक्स कटौती ग्राहकों तक पहुंचाएंगी या नहीं। अक्सर आरोप लगता है कि कंपनियां फायदा खुद रख लेती हैं। हालांकि, सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस बार कंपनियों पर दबाव रहेगा ताकि बिक्री बढ़ाने के लिए राहत सीधे ग्राहकों तक पहुंचे।
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