तीन महीने की समयसीमा और भारी जुर्माना
श्रीलंका में नियम के मुताबिक आयातित वाहनों को कस्टम्स डिक्लेरेशन की तारीख से तीन महीने के भीतर डिपार्टमेंट ऑफ मोटर ट्रैफिक में पंजीकृत कराना अनिवार्य है। तय समयसीमा का पालन न करने पर वाहन के सीआईएफ (कॉस्ट-इंश्योरेंस-फ्रेट) मूल्य का हर महीने 3 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाता है। जो आयातकों और खरीदारों दोनों के लिए भारी पड़ रहा है।
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समयसीमा बढ़ाने और जुर्माना माफ करने की मांग
वाहन आयातकों ने सरकार से न सिर्फ 3 प्रतिशत पेनल्टी माफ करने, बल्कि वाहनों के रजिस्ट्रेशन की अवधि को तीन महीने से बढ़ाकर छह महीने करने का भी अनुरोध किया है। उनका तर्क है कि असाधारण हालात में नियमों में कुछ लचीलापन जरूरी है। ताकि बाजार को संभलने का मौका मिल सके।
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चक्रवात से पहले ही कमजोर पड़ चुका था बाजार
हालांकि आंकड़े बताते हैं कि वाहन बाजार में गिरावट चक्रवात डिटवाह के आने से पहले ही शुरू हो चुकी थी। बाजार पर नजर रखने वाली फर्म जेबी सिक्योरिटीज के अनुसार, नवंबर में कुल वाहन पंजीकरण घटकर 43,810 यूनिट्स रह गया, जो अक्तूबर में 48,081 यूनिट्स था।
नई कारों और दोपहिया-तिपहिया सेगमेंट में गिरावट
नवंबर में नई कारों का पंजीकरण 781 यूनिट्स रहा, जो अक्तूबर में दर्ज 836 यूनिट्स से थोड़ा कम है। इसी अवधि में तीन-पहिया और दोपहिया वाहनों के पंजीकरण में भी गिरावट देखी गई। इस सेगमेंट में बजाज की पकड़ बनी हुई है, जबकि उसके बाद टीवीएस का स्थान है।
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आयात प्रतिबंध के बाद बदला बाजार का स्वरूप
श्रीलंका ने कोविड-19 महामारी और 2022 के आर्थिक संकट के चलते 2020 से कार आयात पर रोक लगा दी थी। इस साल फरवरी से आयात की अनुमति दोबारा दी गई। जेबी सिक्योरिटीज के मुताबिक, आयात प्रतिबंध से पहले भारतीय मूल के वाहन श्रीलंकाई बाजार पर हावी थे, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।
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कार और एसयूवी सेगमेंट में भारतीय कंपनियां लगभग गायब
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय वाहन निर्माता अब मोटर कार, एसयूवी और क्रॉसओवर सेगमेंट में लगभग नजर नहीं आते। हालांकि, दोपहिया और तीन-पहिया वाहनों में भारतीय कंपनियों का दबदबा अब भी कायम है। आयातकों का मानना है कि अगर सरकार राहत देती है, तो बाजार को दोबारा गति मिल सकती है और उपभोक्ताओं का भरोसा लौट सकता है।
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