दिल्ली के लाल किले के पास हुए हालिया बॉम्ब धमाके ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था की खामियों की ओर इशारा किया है, बल्कि पुरानी कारों के स्वामित्व हस्तांतरण सिस्टम की गंभीर खामियों को भी उजागर कर दिया है। जांच में सामने आया कि ह्यूंदै आई 20 कार के पिछले 11 साल में चार बार मालिक बदले जाने के बावजूद आज भी वह अपने मूल मालिक के नाम पर ही पंजीकृत है।
सोमवार यानी दस नवंबर 2025 की शाम हुए धमाके में करीब 13 लोगों की मौत हुई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जांच अधिकारियों को यह कार 11 साल बाद भी उसी मालिक के नाम पर दर्ज मिली, जिसने इसे सबसे पहले खरीदा था। इससे साफ है कि सेकेंड-हैंड कार मार्केट मे कागजी कार्रवाई अधूरी रहती है। असंगठित डीलरशिप्स (स्वामित्व) में प्रक्रिया का पालन नहीं होता और स्वामित्व परिवर्तन अभी भी एक पेचीदा और भ्रष्टाचार-प्रवण प्रक्रिया है।
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एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि आरटीओ राज्य सरकारों के अधीन होते हैं। उन्होंने बताया कि सभी राज्यों के आरटीओ को एक साझा मंच पर लाने की तैयारी चल रही है। वाहन मालिकों के सही मोबाइल नंबर लिंक करने के लिए अभियान जारी है। भविष्य में प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) व अन्य सेवाएं केवल उन्हीं को मिलेगी, जो नंबर वाहन डेटा से मेल खाता होगा। इसके जरिए वाहन स्वामित्व पहचान प्रणाली की सटीकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
2022 में केंद्र ने पुरानी कार प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए कई नए नियम लागू किए थे। इनमें पुरानी कार डीलरों को प्राधिकरण प्रमाणपत्र अनिवार्य, डीलरों को आरसी, फिटनेस सर्टिफिकेट, डुप्लिकेट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (नोओसी) और स्वामित्व परिवर्तन के लिए आवेदन करने का अधिकार, खरीदार-विक्रेता की ओर से वाहन डिलीवरी की ऑनलाइन सूचना देने की व्यवस्था शामिल थी। इतने नियमों के बाद भी डीलरों का दावा है कि ऑनलाइन ट्रांसफर पोर्टल अभी भी निष्क्रिय है। जिसके कारण पुरानी प्रक्रियाओं पर ही निर्भरता बनी हुई है।