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Satellite Toll Tax: सैटेलाइट आधारित टोलिंग में हो सकती है देरी, प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा बनी चिंता

Sat, 01 Mar 2025 08:45 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राष्ट्रीय राजमार्गों (नेशनल हाईवे) पर सैटेलाइट-आधारित टोलिंग (GNSS टोलिंग) फिलहाल जल्द लागू नहीं होने वाला है। सरकार ने संसद की एक समिति को बताया है कि यह नया सिस्टम तभी लागू किया जाएगा जब भारत के पास अपने खुद के नेविगेशनल सैटेलाइट होंगे, जो पूरे देश को कवर कर सकें।
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टोल टैक्स - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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राष्ट्रीय राजमार्गों (नेशनल हाईवे) पर सैटेलाइट-आधारित टोलिंग (GNSS टोलिंग) फिलहाल जल्द लागू नहीं होने वाला है। सरकार ने संसद की एक समिति को बताया है कि यह नया सिस्टम तभी लागू किया जाएगा जब भारत के पास अपने खुद के नेविगेशनल सैटेलाइट होंगे, जो पूरे देश को कवर कर सकें।
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विदेशी नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल नहीं करेगी सरकार
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि नए टोलिंग तंत्र पर एक सवाल के जवाब में सड़क परिवहन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को जेडी(यू) सांसद संजय झा की अध्यक्षता वाली परिवहन और पर्यटन पर संसदीय स्थायी समिति को बताया कि इस टोलिंग सिस्टम के लिए भारत के पास अपना पूरा तरह से कार्यशील नेविगेशन सिस्टम और तकनीक होना जरूरी है। इससे न सिर्फ नागरिकों की गोपनीयता (प्राइवेसी) सुरक्षित रहेगी बल्कि डेटा सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार इस उद्देश्य के लिए किसी विदेशी नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल नहीं करेगी।

सरकार की योजना: फिजिकल टोल प्लाजा हटाने का लक्ष्य
हालांकि, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी पहले कह चुके हैं कि सरकार जल्द ही नए टोल संग्रह प्रणाली की शुरुआत करेगी, जिससे फिजिकल टोल प्लाजा हटाए जा सकें और हाईवे पर सफर करने वालों को राहत मिले। इस नए सिस्टम में ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) का उपयोग किया जाएगा। जिससे वाहन चालकों को सिर्फ उतनी ही दूरी का टोल देना होगा जितनी उन्होंने हाईवे पर यात्रा की है।

क्या है GNSS और NavIC?
GNSS एक सैटेलाइट नेटवर्क है जो लोकेशन, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाएं प्रदान करता है। भारत के पास पहले से ही NavIC (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्सटिलेशन) नाम का अपना नेविगेशन सिस्टम है, लेकिन इसमें कुछ चुनौतियां हैं। जीपीएस और गैलिलियो की तुलना में, NavIC एक क्षेत्रीय नेविगेशन सिस्टम है, जिसका कवरेज सिर्फ भारत और आसपास के कुछ क्षेत्रों तक सीमित है।

GNSS से जुड़ी सुरक्षा चिंताएं
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि, सरकारी अधिकारियों ने संसद समिति को बताया कि पिछले साल एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसकी वजहों में GNSS सिग्नल में गड़बड़ी भी शामिल थी। इसी कारण सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि नया टोलिंग सिस्टम पूरी तरह भारत के अपने नेविगेशन सिस्टम पर आधारित हो।

नई टोलिंग प्रणाली पर उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट का इंतजार
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने GNSS-आधारित टोलिंग के क्रियान्वयन के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई है। सरकार इस समिति की सिफारिशों का इंतजार कर रही है, ताकि इस प्रणाली को लागू करने के लिए सही रोडमैप तैयार किया जा सके। 
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फिलहाल मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग पर काम जारी
अभी के लिए, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग के लिए टेंडर आमंत्रित कर रहा है। इस प्रणाली में फिजिकल टोल प्लाजा नहीं होंगे। टोल वसूली के लिए सड़क किनारे लगे सेंसर और उपकरण वाहन की जानकारी कैप्चर करेंगे और यह डेटा फास्टैग सिस्टम से लिंक होकर सीधे वाहन मालिक के खाते से कट जाएगा।
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