बुनियादी ढांचे के विस्तार से बढ़ा संसाधनों पर दबाव
इंटरनेशनल रोड फेडरेशन (IRF) के इंडिया चैप्टर द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI) के निदेशक मनोरंजन परिदा ने कहा कि भारत में बुनियादी ढांचे का विकास अभूतपूर्व गति से हो रहा है। इसके चलते निर्माण सामग्री की मांग तेजी से बढ़ी है, जिसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इन संसाधनों के अत्यधिक दोहन से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है।
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National Highway 301 in Ladakh
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कचरा प्रबंधन भी बनती जा रही है बड़ी चुनौती
मनोरंजन परिदा ने इस ओर भी ध्यान दिलाया कि देश एक समानांतर संकट से गुजर रहा है, जो है कचरे का बढ़ता अंबार। प्लास्टिक, स्टील स्लैग, रेड मड, निर्माण और विध्वंस से निकलने वाला मलबा और नगर निगम का ठोस कचरा, ये सभी गंभीर निपटान समस्याएं पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए सीआरआरआई ने सड़क निर्माण में इस्तेमाल के लिए नई सामग्री और तकनीकें विकसित की हैं।
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सड़क निर्माण में कचरे से बने समाधान
सीआरआरआई द्वारा विकसित तकनीकों में स्टील स्लैग तकनीक प्रमुख है, जिसमें स्टील उद्योग से निकलने वाले प्रोसेस्ड स्टील स्लैग का उपयोग प्राकृतिक एग्रीगेट के विकल्प के रूप में किया जाता है। यह न केवल कचरे के निपटान में मदद करता है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता भी कम करता है। इस तरह की पहल सड़क निर्माण को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
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सुरक्षा, स्थिरता और नवाचार के बीच संतुलन जरूरी
कार्यक्रम में IRF के प्रेसिडेंट एमेरिटस केके कपिला ने कहा कि सड़क अवसंरचना क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद देश अब भी सुरक्षा, स्थिरता और नवाचार के मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुरक्षित, कुशल और टिकाऊ सड़कों के निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को दोबारा मजबूत करने की जरूरत है। उनके अनुसार 'विजन जीरो' का लक्ष्य केवल दुर्घटनाओं को शून्य तक लाना ही नहीं, बल्कि कार्बन उत्सर्जन को भी शून्य करना है।
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ग्रीन हाईवे और कम-कार्बन तकनीक की जरूरत
कपिला ने कहा कि स्मार्ट और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के विकास के लिए ग्रीन हाईवे और मजबूत सड़क डिजाइन जरूरी हैं। जिन्हें जलवायु के अनुकूल सामग्री और कम-कार्बन तकनीकों का समर्थन मिले। उन्होंने आगाह किया कि मौजूदा समय में सड़क निर्माण देश में पर्यावरण प्रदूषण के सबसे बड़े स्रोतों में से एक है, जो कुल उत्सर्जन का लगभग 37 प्रतिशत हिस्सा है।
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National Highway in Karnataka
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