जगुआर लैंड रोवर (JLR) (जेएलआर) इंडिया ने भारत और ब्रिटेन के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) (एफटीए) का सीधा लाभ अपने ग्राहकों तक पहुंचाने का फैसला किया है। कंपनी ने ब्रिटेन से पूरी तरह से निर्मित इकाई (CBU) (सीबीयू) के रूप में आने वाले अपने फ्लैगशिप मॉडल्स की कीमतों में भारी संशोधन किया है। इसमें सबसे बड़ी कटौती Range Rover SV (रेंज रोवर एसवी) पर की गई है।
एफटीए के प्रभावी होने के बाद कीमतों में आया बदलाव तुरंत लागू हो गया है:
Range Rover SV: इसकी कीमत अब 4.25 करोड़ रुपये से घटकर 3.50 करोड़ रुपये (एक्स-शोरूम) हो गई है, यानी सीधे 75 लाख रुपये की बचत।
Range Rover Sport SV: इसकी कीमत 2.75 करोड़ रुपये से कम होकर 2.35 करोड़ रुपये हो गई है, जिससे यह 40 लाख रुपये सस्ती हो गई है।
FTA का असर: पिछले साल हस्ताक्षरित भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते के तहत, ब्रिटेन में बनी कारों पर आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) को अगले पांच वर्षों में 100 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत तक लाने की योजना है।
प्रतिस्पर्धा: इस समझौते ने जेएलआर जैसे लक्जरी कार निर्माताओं को भारतीय बाजार में अपने प्रमुख मॉडल्स को अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर पेश करने का मौका दिया है।
कीमत कम होने के साथ-साथ कंपनी ने कुछ फीचर्स को स्टैंडर्ड के तौर पर जोड़ दिया है:
पेंट विकल्प: अब 'SV अल्ट्रा मेटैलिक' पेंट (ग्लॉस और साटन फिनिश दोनों) स्टैंडर्ड के रूप में मिलेंगे, जो पहले वैकल्पिक (ऑप्शनल) थे।
इंजन क्षमता: इसमें BMW से लिया गया 4.4-लीटर का ट्विन-टर्बोचार्ज्ड V8 पेट्रोल इंजन है।
पावर: यह इंजन 615 hp की पावर और 750 Nm का टॉर्क पैदा करता है।
ट्रांसमिशन: इसे 8-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स और ऑल-व्हील-ड्राइव सिस्टम के साथ जोड़ा गया है।
यह मॉडल रफ्तार के शौकीनों के लिए तैयार किया गया है:
पावरफुल इंजन: इसमें भी 4.4-लीटर ट्विन-टर्बो V8 इंजन है, लेकिन यह अधिक 635 hp की पावर और 750 Nm का टॉर्क जनरेट करता है।
यह भी 8-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन और ऑल-व्हील-ड्राइव सेटअप के साथ आता है।
नहीं, यह कटौती सिर्फ ब्रिटेन में बनने वाले विशिष्ट सीबीयू मॉडल्स तक ही सीमित है:
स्थानीय असेंबली: भारत में असेंबल होने वाले मॉडल्स जैसे कि Range Rover (Standard), Range Rover Sport, Evoque, Velar और Discovery Sport की कीमतें पहले जैसी ही रहेंगी।
अन्य मॉडल्स: Defender और Discovery की कीमतों पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि इनका निर्माण स्लोवाकिया में होता है और ये भारत-यूके व्यापार समझौते के दायरे में नहीं आते हैं।