राजस्थान सरकार ने राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को प्रोत्साहित करने के लिए राजस्थान इलेक्ट्रिक वाहन नीति (REVP) को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस नीति को इस उम्मीद के साथ मंजूरी दी है कि इस लागू करने से राज्य में डीजल और पेट्रोल वाहनों के कारण होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी। राजस्थान ने बैटरी से चलने वाले वाहनों की खरीद पर राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) प्रतिपूर्ति के लिए 40 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट प्रावधान को मंजूरी दी है।
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मिलेंगे ये फायदे
गहलोत ने 2019-20 के बजट में राजस्थान इलेक्ट्रिक वाहन नीति लाने की घोषणा करते हुए कहा था कि राज्य सरकार सभी प्रकार के इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। हाल ही में स्वीकृत इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत, राज्य ने दोपहिया ईवी के लिए 5,000 रुपये से 10,000 रुपये एसजीएसटी राशि और वाहन की बैटरी क्षमता के आधार पर तीन-पहिया ईवी की खरीद के लिए 10,000 रुपये से 20,000 रुपये की प्रतिपूर्ति करने की घोषणा की है। इसके अलावा, राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को मोटर व्हीकल टैक्स (मोटर वाहन कर) के दायरे से बाहर रखा गया है।
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कई राज्यों ने पेश की ईवी नीति
राजस्थान इलेक्ट्रिक वाहन नीति इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में तेजी लाने के देश के लक्ष्य की दिशा में एक और कदम है। दिल्ली, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मेघालय, गुजरात और पश्चिम बंगाल सहित कई अन्य राज्यों ने अपनी व्यक्तिगत और समर्पित इलेक्ट्रिक वाहन नीतियों को पहले ही पेश या अधिसूचित कर दिया है।
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दिल्ली सबसे आगे
अगस्त, 2020 में अपनी ईवी नीति पेश करने के बाद, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन में सबसे आगे रही है। तब से, शहर ने निजी खिलाड़ियों के साथ सहयोग करके विभिन्न निजी और सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन जोड़े हैं। दिल्ली ने हाल ही में अपने बेड़े में 150 इलेक्ट्रिक बसों को शामिल करने की भी घोषणा की। सरकार ने यात्रियों को इन इलेक्ट्रिक बसों में 26 मई तक तीन दिनों तक मुफ्त यात्रा करने की अनुमति दी है, जबकि महिला यात्रियों को सभी दिनों के लिए इन बसों में मुफ्त यात्रा करने की सुविधा मिलेगी।