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Pollution Challan: दिल्ली में प्रदूषण पर सख्ती, ग्रैप लागू होने के दौरान 31,000 से ज्यादा वाहनों का कटा चालान

Mon, 14 Apr 2025 04:55 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली की हवा को जहरीला बनाने में पुरानी गाड़ियों का बड़ा हाथ माना जाता है। इस साल सर्दियों में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने जानकारी दी कि ग्रेप के नियमों को तोड़ने पर 31,000 से ज्यादा वाहनों का चालान किया गया।
 
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Delhi Pollution - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली की हवा को जहरीला बनाने में पुरानी गाड़ियों का बड़ा हाथ माना जाता है। खासकर सर्दियों के मौसम में जब हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो जाती है, तो सरकार GRAP (ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान) (ग्रेप) लागू करती है, जो सबसे ज्यादा असर इन पुराने वाहनों पर डालती है। इस साल सर्दियों में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने जानकारी दी कि ग्रेप के नियमों को तोड़ने पर 31,000 से ज्यादा वाहनों का चालान किया गया।
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ग्रेप के सख्त नियम
हर साल सर्दियों में जब दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बढ़ जाता है, तो सरकार ग्रेप के तहत सख्त कदम उठाती है। ग्रेप के स्टेज 3 और 4 लागू होने पर बीएस-III पेट्रोल और BS-IV डीजल गाड़ियों पर दिल्ली की सड़कों पर चलने पर रोक लग जाती है। 

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ग्रेप स्टेज 3 तब लागू होता है जब एक्यूआई 350 से ऊपर चला जाता है, और स्टेज 4 तब जब एक्यूआई 400 पार कर जाता है। इन हालातों में पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सबसे पहले कार्रवाई होती है।

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इस बार 42 दिन लागू रहा ग्रेप
डीपीसीसी की रिपोर्ट के मुताबिक इस बार ग्रेप कुल 42 दिन लागू रहा। 13 दिन स्टेज 3 के अंतर्गत और 29 दिन स्टेज 4 के अंतर्गत। इस दौरान प्रशासन ने पुराने नियम तोड़ने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया और हजारों चालान काटे।

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करीब 4.5 लाख गाड़ियों की चेकिंग
जनवरी से दिसंबर 2024 के बीच प्रशासन ने करीब 4.5 लाख गाड़ियों की जांच की। इस दौरान लगभग 50,000 ऐसे ट्रक भी पकड़े गए जो दिल्ली में घुसने की इजाजत नहीं रखते थे लेकिन फिर भी कोशिश कर रहे थे। इन्हें दिल्ली की सीमाओं पर ही रोक कर वापस भेज दिया गया।

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गाड़ियों पर बैन काफी नहीं
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की पर्यावरण विशेषज्ञ अनुमिता रॉय चौधरी का मानना है कि सिर्फ गाड़ियों पर बैन लगाना ही काफी नहीं होगा। लंबे समय का हल तभी निकलेगा जब दिल्ली में बेहतर और भरोसेमंद पब्लिक ट्रांसपोर्ट (सार्वजनिक परिवहन) सिस्टम तैयार किया जाए। 

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उनका कहना है कि अगर लोगों को आरामदायक, समय पर चलने वाली और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी। तो लोग स्वाभाविक रूप से अपनी निजी गाड़ियों का इस्तेमाल कम करेंगे। इससे प्रदूषण पर ज्यादा असरदार तरीके से काबू पाया जा सकता है।

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