अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) संजय भाटिया ने सोमवार को बताया कि यह गिरोह चोरी की गई गाड़ियों के दस्तावेज हासिल करता था। इसके बाद गाड़ी के इंजन और चेसिस नंबर को उसी मॉडल और रंग की दूसरी कार से मिलाता था और फिर उन्हें ऑनलाइन कार बेचने वाले पोर्टलों को बेच देता था।
भाटिया ने कहा, "हमने महिंद्रा थार, टोयोटा इनोवा और एमजी हेक्टर सहित 20 ऐसी एसयूवी बरामद की हैं, जिन्हें आरोपियों ने पिछले कुछ महीनों में CARS24 और CarDekho को बेचा था।"
अधिकारी ने बताया कि गिरोह के सदस्य एसयूवी चोरी करने के बाद उसी मॉडल और रंग की असली कार की तलाश करते थे।
वे असली मालिकों के नाम पर फर्जी पहचान दस्तावेज भी तैयार करते थे, जिसमें उनकी एक तस्वीर भी होती थी और असली मालिकों के नाम पर बैंक खाते भी खोलते थे।
भाटिया ने बताया, "वे नकली आरसी (पंजीकरण प्रमाण पत्र) भी तैयार करते थे और उसी के अनुसार असली कारों के इंजन और चेसिस नंबर उकेरते थे। इस तरह, चोरी की गई गाड़ियों को बेचने के लिए तैयार किया जाता था।"
उन्होंने आगे कहा कि आरोपियों में से एक चोरी की गई कारों को बेचने के लिए ऑनलाइन कार-सेलिंग पोर्टल से संपर्क करता था। चूंकि नकली पंजीकरण संख्या असली से मेल खाती थी, इसलिए वाहन के "चोरी" होने का कोई रिकॉर्ड नहीं होता।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने इसी तरह की कार्यप्रणाली का इस्तेमाल कर 40 से ज्यादा चोरी की कारों को ऑनलाइन पोर्टलों पर बेचा है।
आरोपियों की पहचान अनवर कुरैशी उर्फ हाजी अनवर उर्फ साहिल, 42, मोहम्मद रियाज, 27, किशन कुमार, 31, शहजाद अहमद, 33, विकास कुमार मिश्रा, 29, शाहिल उर्फ शेख, 26, मोहम्मद अल्ताफ, 32, पुरु सिंह, 24, जयंत कुमार जेना, 42, कुंदन गिरी, 29, नौशाद, 37, मोहसिन खान, 54 और ब्रजेश कुमार उर्फ संजीव कुमार, 30 के रूप में हुई है। इन सभी को दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में कुंदन और ब्रजेश CARS24 के पूर्व कर्मचारी हैं और विकास मिश्रा CarDekho का पूर्व कर्मचारी है।
जयंत CARS24 के अधिकारियों को गाड़ियां दिखाता था, मोहसिन पवन उर्फ अंधा से चोरी की गाड़ियां खरीदता था और उन्हें पुरु और नौशाद को बेचता था। और नौशाद चोरी की गई कारों को पुरु सिंह के जरिए आगे बेचता था।
पुलिस के अनुसार, किशन सेकेंड हैंड कार डीलर है, मोहम्मद रियाज एक निजी बैंक कर्मचारी है, शहजाद इंदौर से चोरी की कारें लाता था, शाहिल और अल्ताफ चोरी की गाड़ियों के फर्जी दस्तावेज और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट तैयार करने में मदद करते थे।
जांच के दौरान अनवर ने पुलिस को बताया कि उसने बिजनौर के शादाब के साथ मिलकर इंदौर, मध्य प्रदेश के दानिश के कहने पर चोरी की गाड़ियों की खरीद-फरोख्त शुरू की थी।
पुलिस के अनुसार, अनवर ने खुलासा किया कि चोरी की कारों के लिए नियमित ग्राहक ढूंढना मुश्किल था। इसलिए उन्होंने इन वाहनों को ऑनलाइन पोर्टलों पर बेचने के तरीके तलाशे।