केंद्र सरकार ने देश में इलेक्ट्रिक ट्रकों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत एक नई पहल की घोषणा की है। केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने बताया कि इस योजना के तहत अब इलेक्ट्रिक ट्रकों को भी शामिल कर लिया गया है। स्कीम के तहत ई-ट्रकों के लिए 100 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की जाएगी।
पीएम ई-ड्राइव योजना को 11 सितंबर 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य देश में साफ और टिकाऊ मालवाहन प्रणाली को बढ़ावा देना है। यह योजना 10,900 करोड़ रुपये के कुल बजट के साथ 2 वर्षों के लिए लागू की गई है।
इन ट्रकों को मिलेगा प्रत्साहन
इस योजना के तहत N2 और N3 श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रकों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। N3 कैटेगरी के ट्रैक्टर-पुलर वाहनों के लिए विशेष रूप से इंसेंटिव का प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत ट्रक निर्माताओं को 5 साल या 5 लाख किलोमीटर की वारंटी और वाहन-मोटर पर 2.5 लाख किलोमीटर या 5 साल की वारंटी देनी होगी।
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इंसेंटिव की राशि ट्रक के ग्रॉस वेट पर निर्भर करेगी, जिसमें अधिकतम 9.6 लाख रुपये तक की सहायता दी जा सकती है। यह सहायता सीधे वाहन की खरीद कीमत में कटौती के रूप में दी जाएगी और निर्माता कंपनियों को पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर पीएम ई-ड्राइव पोर्टल से रिइम्बर्स किया जाएगा।
5,600 इलेक्ट्रिक ट्रकों पर मिलेगा लाभ
लगभग 5,600 इलेक्ट्रिक ट्रकों को इस योजना से लाभ मिलने की संभावना है। दिल्ली के लिए 1,100 ई-ट्रकों का लक्ष्य रखा गया है, जिससे राष्ट्रीय राजधानी की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलेगी। इस योजना से सीमेंट, पोर्ट, स्टील और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को खास फायदा होगा। वोल्वो-आशोक लेलैंड, टाटा मोटर्स और आयशर जैसे OEMs पहले से ही इलेक्ट्रिक ट्रकों का निर्माण कर रहे हैं।
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सेल (SAIL) ने अगले दो वर्षों में 150 ई-ट्रक खरीदने का लक्ष्य रखा है और आंतरिक नीति के तहत 15% वाहन बेड़े को EV में बदलने की योजना बनाई है। हालांकि, पुराने प्रदूषणकारी ट्रकों को स्क्रैप करना अनिवार्य होगा तभी ई-ट्रक पर इंसेंटिव मिलेगा।
सरकार का लक्ष्य है कि इस योजना से न केवल ट्रांसपोर्ट लागत कम हो, बल्कि क्लीन एनर्जी की ओर भारी वाहन सेक्टर का रुझान भी बढ़े, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार हो और भारत के 2070 नेट-ज़ीरो लक्ष्य को बल मिले।