दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई हिस्से, पिछले कुछ हफ्तों से भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने एलान किया है कि उसने दिल्ली-एनसीआर में और उसके आसपास विभिन्न इलाकों पर मियावाकी वृक्षारोपण स्थापित करने के लिए 53 एकड़ भूमि की पहचान की है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) (MoRTH) ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि यह कदम नेशनल हाईवे (राष्ट्रीय राजमार्गों) को हरियाली से भरने के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए उठाया जा रहा है। इसके लिए, एनएचएआई विभिन्न जगहों पर नेशनल हाईवे से सटे भूमि भूखंडों पर मियावाकी वृक्षारोपण लगाने के लिए एक अनूठी पहल करेगा।
मंत्रालय ने कहा, "राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे मियावाकी वृक्षारोपण के विकास के लिए प्रस्तावित कुछ स्थलों में हरियाणा सेक्शन के द्वारका एक्सप्रेसवे के साथ 4.7 एकड़ भूमि क्षेत्र, दिल्ली-वडोदरा खंड के दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर सोहना के पास 4.1 एकड़, हरियाणा में अंबाला-कोटपूतली कॉरिडोर के राष्ट्रीय राजमार्ग 152D पर चाबरी और खरखड़ा इंटरचेंज दोनों मेंलगभग 5 एकड़ शामिल हैं।"
इसके अलावा, NH-709B पर शामली बाईपास पर 12 एकड़ से ज्यादा, गाजियाबाद के पास ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर दुहाई इंटरचेंज पर 9.2 एकड़ और NH-34 के मेरठ-नजीबाबाद खंड के पास 5.6 एकड़ भूमि की पहचान की गई है।
इन चुनी हुई जगहों पर जमीनी तैयारियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं और वृक्षारोपण आगामी मानसून मौसम में किया जाएगा। इसे अगस्त 2024 के आखिर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
मियावाकी वृक्षारोपण क्यों?
मियावाकी वृक्षारोपण, जिसे मियावाकी पद्धति के रूप में भी जाना जाता है, इकोलॉजिकल रेस्टोरेशन (पारिस्थितिक बहाली) और वनीकरण विकास के लिए एक अद्वितीय जापानी दृष्टिकोण है।
यह विधि कम समय में घने, देशी और जैव विविध वन बनाने का लक्ष्य रखती है। ये वन भूजल बनाए रखते हैं और भूजल स्तर को रिचार्ज करने में मदद करते हैं। इस पद्धति से पेड़ 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं और वृक्षारोपण ध्वनि और धूल रोधक के रूप में काम करते हैं।
मियावाकी वृक्षारोपण पद्धति के सफल कार्यान्वयन के लिए, उन पौधों की स्वदेशी प्रजातियों को लगाने पर ध्यान दिया जाएगा जो स्थानीय जलवायु और मिट्टी की स्थिति में जीवित रह सकें।
मियावाकी वनों का विकास एक लचीले इकोसिस्टम के निर्माण में योगदान देगा। जो पर्यावरण और स्थानीय समुदाय दोनों को कई तरह के लाभ प्रदान करेगा।
इसके दीर्घकालिक लाभ भी होंगे, जिनमें सूक्ष्म-जलवायु परिस्थितियों में सुधार जैसे वायु और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार शामिल हैं। यह जैव विविधता संरक्षण, हरित आवरण के तेजी से विकास, कार्बन अवशोषण, मिट्टी की बहाली और स्थानीय वनस्पतियों और जीवों के लिए आवास निर्माण में भी मदद करेगा।
पूरे भारत में अभियान का विस्तार किया जाएगा
हालांकि एनएचएआई पहले दिल्ली-एनसीआर में अभियान चला रहा है। लेकिन इसके नतीजों के आधार पर मियावाकी वृक्षारोपण को पूरे देश में दोहराया जाएगा।
मंत्रालय ने कहा कि हरित क्षेत्र में बढ़ोतरी से न सिर्फ नेशनल हाईवे के किनारे रहने वाले नागरिकों के समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ाने में मदद मिलेगी। बल्कि एनसीआर में उन सड़कों पर यात्रा करने पर खूबसूरत नजारों और आनंद में भी बढ़ोतरी होगी।