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Miyawaki: एनएच-31 पर मियावाकी तकनीक से लहलहाएंगे जंगल, हाईवे के किनारे अब 10 गुना तेजी से बढ़ेंगे पेड़

Mon, 11 May 2026 03:41 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने NH31 के गाजीपुर-बलिया खंड पर हरियाली बढ़ाने और वन आवरण के तेजी से विकास को बढ़ावा देने के लिए 'मियावाकी वृक्षारोपण' पद्धति को अपनाया है। जानें क्यों होती यह खास।
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National Highway (Representative Image) - फोटो : PTI
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विस्तार
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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) (एनएचएआई) ने बुनियादी ढांचे को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। NH-31 के गाजीपुर-बलिया खंड पर मियावाकी (Miyawaki) वृक्षारोपण पद्धति को अपनाया गया है। यह पहल सरकार के व्यापक 'ग्रीन हाईवे' कार्यक्रम का हिस्सा है। जिसका मकसद सड़क परियोजनाओं के साथ-साथ हरियाली बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।

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NH-31 किन प्रमुख शहरों से होकर गुजरता है?

NH-31 एक 1,000 किलोमीटर से भी लंबा हाईवे है जो चार राज्यों से होकर गुजरता है। इसके अंतर्गत आने वाले प्रमुख शहरों ने ये नाम हैं:

  • उत्तर प्रदेश: प्रयागराज, गाजीपुर और बलिया।

  • बिहार: छपरा, हाजीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, पूर्णिया और किशनगंज।

  • पश्चिम बंगाल: सिलिगुड़ी, जलपाईगुड़ी और कूच बिहार।

  • असम: कोकराझार, बोंगाईगांव, गोलपारा और गुवाहाटी।

क्या है मियावाकी वृक्षारोपण तकनीक?

मियावाकी पद्धति वनीकरण की एक जापानी तकनीक है:

  • इसमें एक छोटे से क्षेत्र में स्थानीय प्रजातियों के पौधों को बहुत सघन रूप में लगाया जाता है।

  • यह पौधों को तेजी से बढ़ने में मदद करती है, जिससे लगभग तीन साल में एक आत्मनिर्भर मिनी जंगल तैयार हो जाता है।

  • पारंपरिक तरीकों की तुलना में, यह तकनीक शहरी और सड़क के किनारे के वातावरण के लिए विशेष रूप से प्रभावी है। 


मियावाकी पद्धति अपनाने के मुख्य लाभ क्या हैं?

एनएचएआई द्वारा इस तकनीक को लागू करने के पीछे कई बड़े कारण और फायदे हैं:

  • तेजी से विकास: पारंपरिक प्लांटेशन की तुलना में मियावाकी जंगल लगभग 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं। और मात्र 2-3 साल में घना हरित क्षेत्र बना देते हैं।

  • जैव विविधता को बढ़ावा: स्थानीय पौधों के उपयोग से यह पक्षियों, कीड़ों और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) का समर्थन करता है।

  • हवा की गुणवत्ता में सुधार: घनी वनस्पतियां प्रदूषण को सोखने, धूल के स्तर को कम करने और ऑक्सीजन बढ़ाने में मदद करती हैं।

  • कम रखरखाव: एक बार स्थापित होने के बाद, इन जंगलों को बहुत कम पानी या मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है।

  • सीमित स्थान के लिए उपयुक्त: यह तकनीक कम जमीन वाली जगहों जैसे हाईवे डिवाइडर और शहरी गलियारों के लिए आदर्श है।

  • जलवायु अनुकूलन: सघन वृक्षारोपण सतह के तापमान को कम करने, ध्वनि प्रदूषण घटाने और समग्र पर्यावरणीय स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद करता है।

 

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ग्रीनफील्ड नेशनल हाईवे पर इस तकनीक का इस्तेमाल करके, एनएचएआई तीव्र बुनियादी ढांचे के विकास और स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। इससे भारत के राजमार्ग न केवल अधिक सुंदर बल्कि प्रदूषण मुक्त और पर्यावरण के प्रति लचीले भी बनेंगे। 

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