अगर आप नए साल के मौके पर एक नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपकी अगली कार की खरीदारी एक महंगी कवायद बन सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कई वाहन निर्माताओं ने 2022 के जनवरी में अपने संबंधित मॉडलों की कीमतों में बढ़ोतरी की पुष्टि की है।
अगर आप नए साल के मौके पर एक नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपकी अगली कार की खरीदारी एक महंगी कवायद बन सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कई वाहन निर्माताओं ने 2022 के जनवरी में अपने संबंधित मॉडलों की कीमतों में बढ़ोतरी की पुष्टि की है। जहां मारुति ने बाजार में अपने बड़े पैमाने पर बिक्री होने वाले मॉडल्स की कीमतों में बढ़ोतरी का एलान किया है। वहीं Mercedes (मर्सिडीज) और Audi (ऑडी) जैसे लग्जरी सेगमेंट के प्रमुख खिलाड़ी भी इसी राह पर हैं।
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जहां मारुति और ऑडी देश में पेश किए जाने वाले अपने सभी मॉडलों की कीमतों में बढ़ोतरी करेंगे। वहीं पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार मर्सिडीज ने कहा है कि, वह सिर्फ चुनिंदा मॉडलों की कीमतें बढ़ाएगी। हालांकि जो बात एक जैसी है वह यह है कि इन सभी कंपनियों ने बढ़ती लागत को मुख्य कारण बताया है कि क्यों कीमतों में बढ़ोतरी को जरूरी समझा गया है।
Audi Q5 2021 Facelift
- फोटो : Audi India
ऑडी इंडिया के प्रमुख बलबीर सिंह ढिल्लों ने कहा, "बढ़ती लागत और परिचालन लागत की भरपाई के लिए कीमतों में संशोधन जरूरी है। हमारे चुनिंदा वाहनों की नई प्राइस रेंज ब्रांड की प्रीमियम प्राइस पोजिशन सुनिश्चित करेगी, जिससे ब्रांड और हमारे डीलर भागीदारों दोनों के लिए सतत विकास सुनिश्चित होगा।"
Maruti Suzuki Cars
- फोटो : For Reference Only
मारुति ने एक रेगुलेटरी फाइलिंग में विस्तार से बताया कि कीमत बढ़ाए जाने की जरूरत क्यों है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी ने कहा, "पिछले एक साल में, विभिन्न इनपुट लागतों में बढ़ोतरी के कारण कंपनी के वाहनों की लागत पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इसलिए, कंपनी के लिए यह अनिवार्य हो गया है कि इन अतिरिक्त लागतों का कुछ प्रभाव कीमतों में वृद्धि के जरिए ग्राहकों पर डाला जाए।"
Mercedes AMG GLE 63 Coupe
- फोटो : Mercedes-Benz
इन तीन कार कंपनियों के कीमत बढ़ाने का फैसले सिर्फ इन्हीं तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। सेमीकंडक्टर चिप में वैश्विक कमी के साथ एक चुनौती जारी रहने की संभावना के साथ, आपूर्ति-पक्ष के मुद्दों ने लगभग हर एक वाहन निर्माता को परेशान किया है। ऐसे में आशंका है कि अन्य कार निर्माता भी इस रास्ते पर चलते हुए अपने वाहन भी महंगे कर सकते हैं। भले ही पेश किए गए मॉडलों की संख्या और बिक्री संख्या दांव पर हो।
कार प्लांट
- फोटो : For Reference Only
लेकिन कीमतों में बढ़ोतरी के फैसले शायद सबसे बुरे समय में आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जनवरी से आसन्न बढ़ोतरी के कारण दिसंबर की बिक्री को बढ़ावा मिल सकता है। लेकिन कोविड-19 के ओमिक्रॉन वैरिएंट की वजह से भारतीय ऑटोमोटिव क्षेत्र में मांग में सुधार एक बार फिर से संभावित अनिश्चितताओं के निराशा से घिर सकते हैं।
इस नए और ज्यादा संक्रमण फैलाने वाले वैरिएंट का सामना विभिन्न देश कैसे करते हैं, इसका कार कंपोनेन्ट की आपूर्ति और पूरी विश्व की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। चिप की कमी ने कई कंपनियों को अतीत में अपने उत्पादन में कटौती करने के लिए मजबूर किया है। ऐसे में अगर लॉकडाउन की घोषणा की गई तो यह वाहन निर्माताओं के लिए एक और झटका साबित होगा।