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दिल्ली-एनसीआर में 10 साल से पुराने डीजल वाहनों के भविष्य का फैसला आज

Thu, 14 Sep 2017 10:56 AM IST
ब्यूरो/विवेक मिश्रा
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जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले पर अपना फैसला सुनाएगी।
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राष्ट्रीय राजधानी में 10 साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों के भविष्य का अंतिम फैसला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) बृहस्पतिवार को सुनाएगा। 2014 से लंबित इस मामले पर केंद्र सरकार जहां उम्र सीमा के आधार पर डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने के आदेश के खिलाफ रही है वहीं दूसरी तरफ एनजीटी उम्र सीमा के आधार पर पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध को जायज ठहराती रही है। पीठ ने इस चर्चित मसले पर अप्रैल में अपना फैसला सुरक्षित किया था। अब मौजूद तथ्यों, दलीलों और आंकड़ों के आधार पर विस्तृत फैसला सुनाएगा। 
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जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले पर अपना फैसला सुनाएगी। इस पीठ में जस्टिस जावद रहीम, जस्टिस रघुवेंद्र एस राठौर के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए एक्सपर्ट मेंबर बिक्रम सिंह भी शामिल होंगे। 

पुराने डीजल वाहनों को लेकर चुनौती 
एनजीटी 10 वर्ष से अधिक पुराने डीजल वाहनों को दिल्ली-एनसीआर से बाहर उन राज्यों और जिलों में भेजने का भी पूर्व में आदेश दे चुका है जहां गाडिय़ों की संख्या का घनत्व बेहद कम और प्रदूषण भी कम है। फिलहाल कुछ राज्यों की ओर से यह सूची एनजीटी में दाखिल की जा चुकी है। चुनौती यह है कि ऐसे जिलों में पुराने वाहन के खरीदार कब मौजूद होंगे और फिर जमीन की उपलब्धता का अभाव झेल रही दिल्ली में पुराने वाहनों को स्क्रैप करने के लिए कहां रखा जाएगा।
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प्रदूषण पर भी सवाल का मुद्दा 
आईआईटी की रिपोर्ट से ही यह बात साफ हुई थी कि डीजल वाहनों से वातावरण ज्यादा प्रदूषित होता है जबकि केंद्र सरकार अपने हलफनामें में यह कहता रहा है कि डीजल वाहनों से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी बेहद कम है। हालांकि एनजीटी ने स्पष्ट किया था कि डीजल वाहन प्रदूषण के लिए प्रबल जिम्मेदार हैं। केंद्र की न और एनजीटी के पर्यावरणीय दृष्टिकोण के बीच आने वाला यह बहुप्रतीक्षित फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।
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