महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक (एमटीएचएल) के लिए टोल शुल्क तय कर दिया है। सीवरी और न्हावा शेवा को जोड़ने वाला 22 किलोमीटर लंबा ये पुल 12 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमएमआरडीए) द्वारा प्रस्तावित मूल 500 रुपये प्रति कार के बजाय, राज्य सरकार ने प्रति कार एक तरफ की यात्रा के लिए 250 रुपये का शुल्क तय किया है। पुल का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखा जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक माना जा रहा है कि इस पुल के ऊपर से हर दिन 70 हजार वाहन गुजरेंगे। यदि 70,000 गाड़ियां सिर्फ एक तरफ ही जाएं तो भी इस पुल से रोजाना 1 करोड़ 75 लाख रुपये की कमाई होगी।
एमएमआरडीए ने बांद्रा-वर्ली सी लिंक की तर्ज पर एमटीएचएल के लिए टोल वसूलने का प्रस्ताव रखा था। जबकि लोक निर्माण विभाग और शहरी विकास विभाग ने 350 रुपये का टोल प्रस्तावित किया था। लेकिन राज्य कैबिनेट की बैठक के दौरान सीएम एकनाथ शिंदे ने सुझाव दिया कि प्रति कार एक तरफ की यात्रा के लिए टोल 250 रुपये पर तय किया जाए, जिस पर सभी सहमत हुए। कुछ मंत्रियों ने कहा कि रियायती दर एक साल तक जारी रह सकती है।
सरकार ने ट्रांस-हार्बर लिंक पर नियमित यात्रियों के लिए छूट देने का भी फैसला किया है। वापसी पास एक तरफ के किराए के आधे पर उपलब्ध होंगे। जबकि दैनिक पास का खर्च एक तरफ के किराए का 2.5 गुना और मासिक पास का खर्च एक तरफ के किराए का 50 गुना होगा। सरकार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है।
टोल दरें
- सिंगल- 250 रुपये
- रिटर्न- 375 रुपये
- डेली पास- 625 रुपये
- मासिक पास- 12,500 रुपये
विज्ञप्ति में बताया गया है कि एमटीएचएल के निर्माण पर 21,200 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिनमें से 15,100 करोड़ रुपये का लोन था। पुल दक्षिण मुंबई और पनवेल के बीच की दूरी और यात्रा के समय को क्रमशः लगभग 15 किलोमीटर और 1.5 से 2 घंटे कम कर देगा। जिसकी वजह से प्रति कार ईंधन लागत में 500 रुपये की बचत होगी।
सीवरी में कीचड़ के मैदानों पर हर साल लगभग छह महीने रहने वाले फ्लेमिंगो की सुरक्षा के लिए पुल के दोनों किनारों पर पहले चार किलोमीटर तक ध्वनि अवरोधक लगाए गए हैं। 4-10 किलोमीटर से हर किलोमीटर पर महुल में अत्यधिक संवेदनशील भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) और तेल रिफाइनरी की सुरक्षा के लिए विजुअल बैरियर (दृश्य अवरोधक) लगाए गए हैं।
वर्ली-सीवरी कनेक्टर के पूरा होने के बाद एमटीएचएल को एक बड़ा बढ़ावा मिलेगा और पश्चिमी उपनगरों से आने वाली कारें पुल तक पहुंच सकेंगी।