पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक को सुव्यवस्थित करने की कोशिश में, महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) ने हाईवे ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (HTMS) को लागू करने का फैसला किया है। इसमें गति सीमा निर्धारण और उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाने में मदद करने के लिए रफ्तार का पता लगाने वाला सिस्टम और लेन अनुशासन उल्लंघन का पता लगाने वाला सिस्टम शामिल है।
MSRDC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हम HTMS के हिस्से के रूप में इस महीने के आखिर तक 430 एडवांस्ड सीसीटीवी कैमरे लगाएंगे। यह सिस्टम हमें स्पॉट और औसत रफ्तार का पता लगाने, लेन अनुशासन उल्लंघन का पता लगाने, व्यावसायिक वाहनों के लिए वजन माप प्रणाली, टोल बूथों पर ऑटोमैटिक वाहन काउंटर और वर्गीकरणकर्ताओं में मदद करेगी। इस सिस्टम के साथ, एक्सप्रेसवे पर अराजकता पैदा करने वाले लापरवाह ड्राइवरों के खिलाफ सीधी कार्रवाई करना संभव होगा। जिनसे यातायात व्यवधान और दुर्घटनाएं होती हैं।"
अधिकारी ने कहा, "कैमरे लगाने का काम पूरा हो चुका है और फिलहाल उसी की टेस्टिंग चल रही है। जून के आखिर तक टेस्टिंग हो जाने के बाद, हम सिस्टम को चालू करने की स्थिति में होंगे।"
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे में कई मोड़ और घुमाव हैं। यह घाट, झरनों और अन्य खूबसूरत स्थलों से होकर गुजरता है। जिससे, यात्री रमणीय दृश्यों का आनंद लेने के लिए सड़क के किनारे अपने वाहन रोक देते हैं। नतीजतन, वे बेतरतीब ढंग से वाहन खड़े करते हैं जो दुर्घटनाओं का कारण बनता है।
इससे उबरने के लिए, MSRDC ने कथित तौर पर एक्सप्रेसवे के किनारे कुछ दूरी पर वाहन रोकने की सुविधा प्रदान करने का प्रस्ताव रखा है। घाट में भारी वाहनों के लिए दो विशेष ठहराव प्रस्तावित हैं, जहां वाहन चालक कुछ समय के लिए ब्रेक ले सकते हैं। फिलहाल, घाट चढ़ने के बाद भारी वाहन अक्सर हाईवे पर रुकते हैं। जिसके कारण उनके पीछे आने वाले वाहनों से टक्कर हो जाती है। इस तरह की घटनाओं में बढ़ोतरी को देखते हुए ये विशेष स्टॉप बनाए जाएंगे।
इस बीच, MSRDC मई, 2025 तक एक्सप्रेसवे पर मिसिंग लिंक परियोजना को चालू कर देगा। इस परियोजना का लक्ष्य दोनों शहरों के बीच मौजूदा सड़क नेटवर्क में महत्वपूर्ण अंतराल को पाटना और निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करना है।
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और NH-4 खालापुर टोल प्लाजा के पास मिलते हैं और खंडाला एक्जिट के पास अलग हो जाते हैं। अडोशी टनल से खंडाला एक्जिट तक का सेक्शन छह लेन की सड़क है। लेकिन इस सेक्शन में 10 लेन की सड़क (YCEW की छह लेन और NH-4 की चार लेन) का ट्रैफिक चलता है। भारी मात्रा में यातायात और भूस्खलन के कारण इस खंड में जाम लग जाता है।
इस खंड में स्पीड कम होने और यात्रा के समय में इजाफा होने के कारण और समय बचाने के लिए, वाहन एक्सप्रेसवे के बाकी हिस्सों पर तेज रफ्तार से चलते हैं। जिसके कारण दुर्घटनाओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। एक्सप्रेसवे के लिए किए गए व्यवहार्यता अध्ययन में पूरे घाट खंड के लिए एक वैकल्पिक मार्ग का सुझाव दिया गया था।