लैंबॉर्गिनी कार एक्सीडेंट मामला
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क्या 'VIP बच्चों' और आम पीड़ितों के लिए अलग न्याय है?
इन तमाम घटनाओं के बीच एक कड़वी सच्चाई उभरती है। अक्सर धनी और प्रभावशाली परिवारों से जुड़े आरोपी त्वरित जवाबदेही से बच निकलते हैं। शराब, तेज रफ्तार और कई बार बिना रजिस्ट्रेशन वाली महंगी गाड़ियों से जुड़े ये हादसे सिस्टम की खामियों को उजागर करते हैं। जिसमें देरी से ब्लड टेस्ट, सबूतों से छेड़छाड़, दबाव में बयान और राजनीतिक दखल जैसे न जानें कितने खेल नजर आते हैं।
जहां ट्रक ड्राइवर वर्षों जेल में सड़ते हैं, वहीं पॉर्शे कार से कुचलने वाले निबंध लिखकर जमानत पा लेते हैं। फिर भी जनआक्रोश ने कुछ सकारात्मक कदम भी दिलाए हैं। जिसमें पब सील हुए, अफसर निलंबित हुए और फास्ट-ट्रैक अदालतें सक्रिय हुईं। ये संकेत देते हैं कि सुधार संभव है, बशर्ते इच्छाशक्ति हो।